सनावद की बेटी भी पिता की भांति चली संन्यास मार्ग पर।

JAIN SANT NEWS सनावद

सनावद की बेटी भी पिता की भांति चली संन्यास मार्ग पर।
सनावद

शास्त्रों में उल्लेख है कि श्री ऋषभदेव भगवान की दीक्षा के बाद उनके पुत्रो तथा पुत्रियों श्री ब्राह्मी एवम सुंदरी ने भी आर्यिका दीक्षा ली। वर्तमान युग मे भी पुराणिक इतिहास दृष्टिगत हो रहा है।
जी हा वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागरजी महाराज से श्रवणबेलगोला में दीक्षा लेकर श्री त्रिलोकचंद जैन सनावद के गौरव थे वे आगे चलकर मुनि श्री 108 चारित्र साग़रजी सन 1993 में हुए।

इतना ही नही आगे चलकर इनके लौकिक जीवन की पोती बाल ब्रह्मचारिणी सिद्धा दीदी ने सनावद ने वात्सलय वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज से श्रवण बेलगोला में 25 अप्रैल 2018 को आर्यिका दीक्षा अंगीकार की।और नामकरण हुआ आर्यिका 105 महायशमती माताजी।

कितना यह अदभुत संयोग है की उन्ही के कदमो पर पायदान रखते हुए लौकिक पुत्री साधना दीदी जो 7 प्रतिमा धारी है वह भी नारी जगत की सर्वोच्च आर्यिका दीक्षा आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी से 5 अक्टूबर 2022 को श्री महावीर जी मे लेगी। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि आपके भतीजे श्री नरेन्द्र जैन सनावद ने भी तपस्वी सम्राट आचार्य श्री 108 सन्मति सागर जी महाराज से लदीक्षा लेकर मुनि श्री 108 श्रेष्ठ सागर महाराज हुए। अगर गोर करे तो इनके पीहर पंचोलिया परिवार से 6 दीक्षाएं हुई है।

परिचय साधना दीदी का
जानकारी को सांझा करते हुए गृहस्थ अवस्था के भाई अजय एवम राजेश पंचोलिया ने विशेष जानकारी में बताया कि श्रीमती लीलावती श्री त्रिलोकचंद जैन सनावद की पुत्री साधना जैन का जन्म 4 जुलाई 1962 को सनावद में हुआ।आपका विवाह महेश्वर के आदरणीय श्री शरद कंठाली से हुआ। आपके एक पुत्री सावन तथा पुत्र समर कंठाली है। पिताजी की मुनि दीक्षा से प्रभावित इनके कदम भी वैराग्य मार्ग पर धीमे किंतु मजबूती दृढ़ता से बढ़ने लगे।

बचपन मे दादी ओर मम्मी से प्राप्त संस्कारो धार्मिक शिक्षा से वैराग्य का बीज अंकुरित होता रहा। इनकी दादी प्रतिदिन एक रस छोड़कर एकासन से भोजन करती थी।

सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट के निकट सनावद होने से सनावद में अनेक बड़े आचार्यो, आर्यिका माताजी के चातुर्मास का संत समागम सनावद को मिला। इन्होंने सन 2001 में आजीवन शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम सनावद में लिया। सन 2002 को लौकिक पिता श्री चारित्र सागर जी की समाधि को सनावद में बहुत नजदीक से देखने का पुण्य अवसर मिला।

जीवन का टर्निंग पाइंट
इनके जीवन मे टर्निंग पाइंट जब आया तब पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री 108 वर्द्धमान सागर जी महाराज के गृह जन्म निमाड़ जिले का प्रथम सिद्धवरकूट चातुर्मास रहा। लगातार 4 माह चौका लगाया तब 8 दीक्षाएं नजदीक से देखी। वर्ष 2016 पावागिरी उन सिद्ध क्षेत्र में पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री के निर्देशन में हुए पंच कल्याणक में आप दोनों दम्पति को सौधर्म इंद्र एवम इंद्रानी बनने का पुण्य अवसर मिला। तप कल्याणक 7 दिसंबर 2016 को 5 वर्ष में वैराग्य मार्ग पर बढ़ने के लिए आचार्य श्री संघ में शामिल होने की भावना व्यक्त की। श्री शरद कंठाली का स्वास्थ्य खराब होने पर सपरिवार बहुत सेवा की अंतिम समय मे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करा कर श्री ऋषि तीर्थ पर आचार्य श्री प्रसन्न ऋषि जी संघ सानिध्य में समता पूर्वक समाधि मरण हुआ। पारिवारिक दायित्व पूर्ण कर विगत 3 वर्षों से आचार्य श्री संघ में शामिल होकर बुआजी के नाम से प्रसिद्ध है।
वर्ष 2017 में आपने आजीवन ब्रहचर्य व्रत श्रवण बेलगोला में राष्ट्र गौरव आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी से लिया।
दीक्षा हेतु श्रीफल चढ़ाया
वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के निमाड़ आगमन पर धामनोद में वर्ष 2022 को समस्त परिजनों के सहित उत्साह पूर्वक दीक्षा हेतु आचार्य श्री को श्रीफल भेंट कर दीक्षा हेतु निवेदन किया।
व्रत नियम

दो प्रतिमा के नियम 15 जुलाई 2021 को कोथली कर्नाटक में लिए
तथा 7 प्रतिमा के नियम 29 अगस्त 2022 को आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी से श्री महावीर जी मे लिया।

उत्तम अनुकरणीय प्रशसनीय त्याग

पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के 73 वे वर्ष वर्द्धन अवतरण वर्ष के उपलक्ष्य में सोने का छत्र भूगर्भ से प्रगटित चमत्कारी 1008 श्री महावीर स्वामी पर आचार्य श्री एवम संघस्थ साधुओं के सानिध्य में 7 प्रतिमा धारी संघस्थ साधना दीदी ,पूर्वा, समर तथा स्पर्श कंठाली इंदौर द्वारा अर्पित किया गया। इस अवसर पर पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ,पूज्य मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी, आर्यिका श्री वत्सल मति जी आर्यिका श्री विन्रम मति जी आर्यिका श्री महायशमती जी एवम परिजन राजेश पंचोलिया , अजय , पूनम दीप्ति निर्मला दीदी, उपस्तिथ थी।
घर चल अचल संपत्ति का आजीवन त्याग

दश लक्षण पर्व 2022 में महावीर जी अतिशय क्षेत्र में उत्तम आकिंचन्य दिवस पर घर चल अचल सभी ब्राह्य परिग्रह का आजीवन त्याग आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी समक्ष किया।

आगामी 5 अक्टूबर 2022 दशहरे पर आपकी दीक्षा अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी मे पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के कर कमलों से होगी।
राजेश पंचोलिया इंदौर

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

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