महरौनी (ललितपुर)। श्री दिगम्बर जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व का आठवां दिन उत्तम त्याग धर्म के रूप में मनाया गया। प्रात कालीन बेला में जिन अभिषेक पूजन किया गया। बड़े मंदिर मे मूल नायक भगवान अजित नाथ भगवान का स्वर्ण और रजत कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य सुमत मिठया, संजीव सराफ, प्रदीप चौधरी और चक्रेश बुखारिया को प्राप्त हुआ। शांति धारा करने का सौभाग्य सुनील बडकुल एवं महेद्र सिंघई बाबा को प्राप्त हुआ। चंवर डुलाने का सौभाग्य चक्रेश बुखारिया को मिला और छत्र श्रीनिवास कठरया द्वारा चढ़ाया गया। दशलक्षण महापर्व पर सामूहिक पूजन और दशलक्षण महापर्व पूजन किया गया। सांगानेर से आये विद्वान अंकित भैया ने प्रवचन में कहा कि त्याग के बिना कोई धर्म जीवित नहीं रह सकता। जिसने भी अपने जीवन में त्याग किया है, वही चमकता है। धर्म और आत्मा को जीवित रखने के लिए त्याग आवश्यक है। समस्त भोग विलास की वस्तु का त्याग करना ही मुक्ति का मार्ग है। अपने जीवन में खराब कार्यों और पापों का त्याग करना चाहिए, तभी मनुष्य जीवन की सार्थकता है।
सांध्यकालीन बेला में संगीतमयी जिन आरती हुई। अखिल भारतीय महिला परिषद द्वारा जैन भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें बच्चों और महिलाओं ने अपनी प्रस्तुति दी। वहीं श्री चंद्रप्रभु जिनालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम के अन्तर्गत संस्कारों का शंखनाद नाटक का मंचन किया गया।
