भारत गौरव चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनीलसागर जी की पावन निश्रा में वृहद चिकित्सक संघोष्ठी-शाकाहार का वैज्ञानिक महत्व पर

JAIN SANT NEWS जयपुर

भारत गौरव चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनीलसागर जी की पावन निश्रा में वृहद चिकित्सक संघोष्ठी-*शाकाहार का वैज्ञानिक महत्व पर

जयपुर

राजधानी जयपुर की भट्टारक जी की नसिया में अहिंसामयी विश्व धर्म प्रभावक श्रमण मार्तण्ड आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुराज की अतिशय निश्रा में जैन डॉक्टर्स सोसायटी द्वारा दिनांक 28 अगस्त को देश के ख्यातनाम चिकित्सको के मध्य विशाल संघोष्ठी आयोजित की गई।
जिसमे लोगो को जीवनदान व सुरक्षा देने वाले चिकित्सको ने शाकाहार के फायदे,उसकी आवश्यकता व वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।

इसमे स्वास्थ मंत्रालय राजस्थान के प्रमुख सलाहकार,SMS मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ सुधीर भंडारी ने मांसाहार से होने वाले अनेक रोगों के बारे में आंकड़ों के साथ जानकारी प्रदान की साथ ही शाकाहार से शरीर को होने वाले सेकड़ौ लाभ पर फोकस करवाया।

संघोष्ठी में आये प्रमुख चिकित्सको ने बताया कि शाकाहार अर्थात मांस भक्षण को नही करना तो है ही साथ ही जैन सिद्धान्त के अनुसार खाद्य व पेय पदार्थों की शुद्ध अवस्था की मर्यादा भी दर्शायी गयी है। जो पूर्णतया वैज्ञानिक हैकि कैसे कोई खाद्य सामग्री निश्चित समय के पश्चात सूक्ष्म रोगाणु,जीवाणु से युक्त हो जाती है। जो न सिर्फ मांस के बराबर अपितु फूड पॉइज़न बन जाता है जो शरीर के लिए अत्यंत घातक है।
रात्रि भोजन की महत्ता को बताया

रात्रि भोजन त्याग करने की महत्ता को बताते हुए चिकित्सको ने कहा कि सूर्यास्त से 45 मिनिट पूर्व भोजन कर लेना चाहिए क्योकी तब तक वातावरण में मच्छर व सूक्ष्म जीव अल्प होते है जिससे भोजन करना सुरक्षित तो है ही साथ ही सोने तक के समय मे 4 से 5 घण्टो का अंतर रहता है जिससे हमारा पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है,जो लोग रात्रि भोजन करते है उनके भोजन व शयन में समयांतर नही होने से पाचनतंत्र व ह्रदय सबंधी रोग के शिकार होते है,देर रात तक भोजन व पानी किडनियों को नुकसान पहुचाती है क्योंकि सोने का समय हो जाने से लगभग रात्रि के 8 घण्टो तक शरीर की पूर्ण मल शुद्धि नही हो पाती, जो लोग सूर्यास्त से पूर्व ही भोजन पानी कर लेते है उनके सोने से पूर्व 4 घण्टो में ही मलमूत्र विसर्जन से शुद्धि हो जाती है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है।
शाह मधोक चितरी ने बताया की इस तरह शाकाहार व मर्यादित आहार आदि विषय पर पूज्य आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुराज की छत्रछाया में प्रमुख चिकित्सको द्वारा वैज्ञानिक व्याख्या ने जैन दर्शन के सिद्धांतों की प्रामाणिकता पर बल दिया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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