दशलक्षण महापर्व- उत्तम संयम धर्म“
उत्तम संयम पालैं ज्ञाता,नर-भव सफल करै ले साता”-
“स्वदेशी अपनाओ,विदेशी हटाओ” पर आधारित नाटिका की प्रस्तुति


ललितपुर। वर्णीनगर मड़ावरा में दशलक्षण महापर्व के छठवें दिन उत्तम संयम धर्म के अवसर पर नगर में चातुर्मासरत आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य अष्टम् निर्यापक मुनिश्री अभय सागर, मुनिश्री प्रभात सागर, मुनिश्री निरीह सागर महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में श्री महावीर विद्या विहार के परिसर में प्रात:काल श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन व धार्मिक क्रियायें सम्पन्न हुईं। शांति धारा करने का सौभाग्य अरविंद जैन गौना, गोपीलाल राजकुमार, शिक्षक छन्नूलाल, रोहित जैन डोंगरा परिवार को प्राप्त हुआ। श्रावक श्रेष्ठी बनने का सौभाग्य त्रिलोक जैन सौंरई, मुनिश्री ससंघ को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य सिंघई प्रकाशचंद्र,राजू सेठी, दीपक सेठी,अन्नू सेठी परिवार एवं रोहित जैन डोंगरा परिवार को प्राप्त हुआ।
इस दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री निरीह सागर महाराज ने कहा कि संयम को धारण करके व्यक्ति महान बनता है। दिगम्बर मुनिराज संयम को धारण करके संयम के पथ पर चलते हैं। इंद्रियों पर संयम रखकर ही व्यक्ति संयम के पथ पर चल सकता है। पांचों इंद्रियों पर आत्म नियंत्रण एवं मन की प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखना और काय के जीवों की विराधना न करना उत्तम संयम है।
दोपहर में मोक्ष शास्त्र का वाचन हुआ। अर्थ सहित व्याख्या परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री अभय सागर महाराज के मुखारविंद से की गई।रात्रि में संस्कृति सराफ के निर्देशन में “स्वदेशी अपनाओ,विदेशी हटाओ” पर आधारित नाटिका प्रस्तुत की गई। जैन युवा जागृति सेवा समिति के म्यूजिक डायरेक्टर धर्मेंद्र सराफ के निर्देशन में आध्यात्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के मंत्री राजेश जैन सौंरया ने किया।
मुनि ससंघ का मडावरा जैन समाज को मिला आशीर्वाद
चातुर्मास समिति के महामंत्री डा. राकेश सिंघई ने बताया कि सकल दिगम्बर जैन समाज मड़ावरा ने मुनिश्री ससंघ के पावन सान्निध्य में श्रीफल भेंटकर समोशरण विधान कराने का संकल्प लिया। यह विधान 26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक मुनिश्री ससंघ के पावन सान्निध्य एवं लब्धप्रतिष्ठित विद्वान ब्रह्मचारी भैया प्रदीप जैन सुयश अशोकनगर के निर्देशन में आयोजित किया जायेगा।
मुनिसंघ ने सकल दिगम्बर जैन समाज मड़ावरा को मंगल आर्शीर्वाद दिया।
सुगंध दशमी का महिलाओं ने किया व्रत, मंदिरों में रखे धूप कुंड में खेई धूप
बताते चलें कि नगर की महिलाओं ने ग्यारह जिनालयों की वंदना की और मंदिरों में रखे धूप कुंड में धूप खेई।सुगंध दशमीं का व्रत सौभाग्यवती महिलाएं रखती हैं। इस दिन महिलाएं उपवास रखकर व्रत का पालन करती हैं। मंदिर में बैठकर स्वाध्याय करती हैं व सुगंध दशमी व्रत की कथा आपस में बैठकर सुनती हैं। इस कथा में बताया गया है कि रानी मनोरमा ने मुनि निंदा की थी जिस कारण उन्होंने अगले जन्म में दुर्गंधा नाम की कन्या के रूप में जन्म लिया था। जब उस कन्या की शादी हुई, उसके पिता ने मुनि श्री से अपने पूर्वभव के बारे में पूछा तो मुनिश्री ने कहा कि तुम्हारी पुत्री ने पूर्वभव में मुनिराज की निंदा की थी। रानी मनोरमा ने मुनि निंदा की थी जिस कारण से दुर्गंधा नाम की कन्या के रूप जन्म लिया है। इसलिए इसके शरीर से बहुत दुर्गंध आती है। दुर्गंधा के पिता ने मुनिराज से इस कष्ट का निवारण पूछा तो मुनिराज ने उपाय बताया कि तुम्हारी पुत्री सुगंध दशमी के व्रत का पालन करे, जिससे तुम्हारें कर्मों का क्षय होगा। इस व्रत का पालन करने से दुर्गंधा नाम की कन्या बिल्कुल ठीक हो जायेगी। उसी समय से महिलाएं सुगंध दशमी का उपवास रखकर व्रत का पालन करने लगीं।
