साधु गंदे आदमी के विचारों में से अच्छाई निकाल लेता है-सुधासागरजी महाराज
ललितपुर
ये शरीर स्वभाव से अशुचि है। इस अशुचि पैरों को भी रत्नत्रय ने पावन बना दिया।रत्नत्रय ने इस अशुभ शरीर को भी पवित्र बना दिया। इसी प्रकार जो शुचिता प्रकट हुई है वह शौचधर्म के बाद शुचिता को प्राप्त हो जाती है।
जिस व्यक्ति की दृष्टि में स्वयं की जिंदगी अनमोल हो जाती। यदि उसकी जिंदगी में बुराई भी आ जाती है तो वह बुराई को दूर कर लेता है। कभी कभी बुरे लोगों के बीच में भी अच्छे लोग निकल आते हैं। कीचड़ में भी कमल खिल जाता है। अभाव के बीच में भी सद्भाव कर लेता है। उसकी हर वस्तु अनमोल हो जाती है।कौन करता है जिंदगी को अनमोल कौन करता है जो तुम्हारी जिंदगी में चीज आई है तुम्हारे मन में जो विचार आये वही अनमोल हो जाये। आचार्य भगवंत श्री नेमीचंद महाराज ने कहा कि जो तुम्हारे मन में विचार आ जाये उसे बेकार मत नहीं होने देना उन विचारों से अपनी ज़िंदगी को अनमोल बनालेता है साधु गंदे आदमी के विचारों को सुनकर उसमें से अच्छाइयों को निकाल लेता है।यह उद्गार श्रावक संस्कार शिविर को संबोधित करते हुए मुनिपुगंव श्री
सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए
*पांच मंजिला गुफा होगी आकर्षक का केन्द्र


मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर में देश के कोने कोने से आए शिविरार्थी भिक्षा चर्चा पूर्वक संस्कार ग्रहण कर रहे हैं जहां परमपूज्य मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के साथ ही देश के प्रमुख विद्वानों द्वारा विशेष कक्षाएं ली जा रही है मुनिश्री के आशीर्वाद से पांच मंजिला विशाल गुफा में चौबीस के साथ मान स्तंभ की स्थापना की जायेगी।
खाली समय का सदुपयोग करते हुए पुण्य अर्जित करें
उन्होंने कहा कि चौबीस घंटे में से एक घंटे का जो समय आपके पास बचा है उसे यूंही ठलवाई में नहीं गवाना। अभिनन्दन नाथ भगवान की शरण में आ जाना, और उसे अनमोल कर लेना। ज्ञानी व्यक्ति के सम्पर्क में आते ही अज्ञानी भी ज्ञान को प्राप्त कर लेता है।ज्ञानी व्यक्ति के पास आकर ढलुआ व्यक्ति को भी भक्त बना दिया। साधु अपनी आखो से गंदे को भी अनमोल कर देता है।साधु अनित्य में से शाश्वत अविनाशी नित्य भावना निकाल लेता है। साधु की आंख ने अशुचि का ध्यान करके उन गंदे विचार को अशुचि भावों का चिंतन कर शुचिता को निकाल लेते हैं। संसार धुला नहीं है संसार को संसार भाव में डाल देना वह अनमोल हो जायेगा।
पुदगल पाषाण मे भी भक्त को भगवान दिख जाते हैं
उन्होंने कहा कि-सत्य का कोई दरवाजा नहीं होता सत्य की कोई सीमा नहीं होती सत्य के कारण एक पाषाण में भी भगवान की मूर्ति दिख जाती है। भक्ति की आंख पुदगल में भगवान को देख लेता है। सारी दुनिया देख रहीं हैं पाषाण की मूर्ति का नवहन कर रहा है।भक्त कह रहा है भगवान का अभिषेक कर रहा है। सत्य क्या है यदि आनंद कूट शिखर से मोक्ष चलें गये तो क्षेत्रपाल मन्दिर में साक्षत अभिनन्दन नाथ भगवान बैठे है। बन्धुओ दुनिया में अंनत सत्य है उनमें से ही एक सत्य ये भी है कि भगवान मन्दिर में बैठे है।
भक्त की भक्ति में होता है चमत्कार
उन्होंने कहा कि कौन से सत्य में चमत्कार हैं मेरा मस्तक जहां झुक जाये वहीं भगवान प्रकट हो जाये। भगवान से भी ज्यादा तुम्हारे नमस्कार में सत्य प्रकट हो जाये। भगवान में चमत्कार हैं कि नमोस्तु नमोस्तु में चमत्कार हैं तभी से एक पाषाण को नमस्कार करते ही मूर्ति प्रकट हो जाती है। जो है नहीं उसमें भगवान दिखाना है।भगवान का सत्य तो समझा है भक्त के सत्य को समझना है भक्त के सत्य से तुम्हारा कल्याण होगा।
सत्य कभी पर रूप नहीं होता मेरे नमोस्तु में सत्य है भगवान श्री आदिनाथ में चमत्कार नहीं है। भक्त की भक्ति में चमत्कार हैं।आपने लाख उपाय कर लें जहां हम है वहां भगवान है ये कौन सा भगवान है ये नमोस्तु वाला भगवान है जिसकी हमें आवश्यकता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
