जैन धर्म के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का गर्भ कल्याणक दिवस मनाया –
उत्तम आर्जव रीति बखानी, रंचक दगा बहुत दुखदानी
-दशलक्षण महापर्व का तीसरा दिन -गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ के सानिध्य में पदमपुरा में मनाया वीतराग धर्म का उत्तम आर्जव लक्षण -श्रावक संस्कार साधना शिविर में उमड़े श्रद्धालु-
शनिवार 03 सितम्बर को मनाया जावेगा वीतराग धर्म का उत्तम शौच लक्षण
जयपुर – 02 सितम्बर – दिगम्बर जैन धर्मावलंबियों के चल रहे दशलक्षण महापर्व में तीसरे दिन वीतराग धर्म का लक्षण उत्तम आर्जव भक्ति भाव से मनाया गया। साथ ही जैन धर्म के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का गर्भ कल्याणक दिवस भी मनाया गया।


इस मौके पर मंदिर परिसर जयकारों से गुंजायमान हो उठे।
राजस्थान जैन युवा महासभा के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने बताया कि दिगम्बर जैन मंदिरों में प्रातः श्री जी के अभिषेक, शांतिधारा के बाद दशलक्षण धर्म की विधान मंडल पर अष्ट द्रव्य से पूजा अर्चना की गई।
इस मौके पर जैन धर्म के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का गर्भ कल्याणक दिवस मनाया गया। पूजा के दौरान गर्भ कल्याणक अर्घ्य चढाया गया ।महाआरती से समापन हुआ।
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने उत्तम आर्जव पर प्रवचन दिया जिसमें बताया गया कि ” कपट न कीजे कोय, चोरन के पुर ना बसे। सरल सुभावी होय, ताके घर बहु सम्पदा।। उत्तम आर्जव रीति बखानी, रंचक दगा बहुत दुखदानी। मन में होय सो सचन उचरिये, वचन होय सो तन सौ करिये।। ” अर्थात मनुष्य को सरल स्वभावी होना चाहिए। जो उसके मन में हो वही बात अपनी कथनी में कहनी चाहिए। किसी को दगा नहीं देना चाहिए। किसी के प्रति छल कपट की भावना नहीं रखनी चाहिए। इस मौके पर आयोजित धर्म सभा में चातुर्मास समिति के उपाध्यक्ष प्रदीप जैन एवं अन्य गणमान्य श्रेष्ठीजनो द्वारा
दीप प्रज्जवलन किया गया।
दस दिवसीय श्रावक संस्कार साधना शिविर के संयोजक सुबोध चांदवाड, जिनेन्द्र जैन’जीतू’ ने बताया कि शिविर में प्रातः 5.00 बजे से रात्रि 9.30 बजे तक आत्म साधना के साथ पूजा भक्ति के विशेष आयोजन किये गये ।
उपाध्यक्ष प्रदीप जैन के अनुसार
शिविर में ब्रह. प्रियंका दीदी द्वारा
प्रातः ध्यान एवं योग करवाया गया। तत्पश्चात भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। पं. अनिल शास्त्री के निर्देशन में आर्जव धर्म की संगीतमय पूजा की गई।शिविरार्थियों ने संगीत की धुनों पर
भक्ति नृत्य किये।
दोपहर में तत्वार्थ सूत्र, द्रव्य संग्रह का ज्ञान दिया गया। सायकांल प्रतिक्रमण पाठ के बाद रात्रि में महाआरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम किये गये ।
विनोद जैन कोटखावदा के मुताबिक शनिवार, 03 सितम्बर को वीतराग धर्म का उत्तम शौच लक्षण मनाया जाएगा। कई स्थानों पर उत्तम सत्य लक्षण मनाया जाएगा।
श्री जैन के मुताबिक दशलक्षण महापर्व शुक्रवार 09 सितम्बर तक चलेगा । 04 सितम्बर तक पुष्पांजलि व्रत, 09 सितम्बर तक दशलक्षण व्रत किये जायेंगे। इस दौरान धर्म के 10 लक्षणों की पूजा आराधना की जावेगी । प्रतिदिन एक धर्म पर विशेष प्रवचन होगा। 03 सितम्बर को निर्दोष सप्तमी तथा 05 सितम्बर को सुगन्ध दशमी मनाई जावेगी ।इस दिन मंदिरों में ज्ञान वर्धक तथा संदेशात्मक झांकियां सजाई जावेगी। 07से09 सितम्बर तक कर्म निर्झरा तेला, 8 से 10 सितम्बर तक रत्नत्रय व्रत व तेला किया जाएगा।
श्री जैन के मुताबिक 09 सितम्बर को अनन्त चतुर्दशी एवं दशलक्षण समापन कलश होगें । 11 सितम्बर को षोडशकारण समापन कलश एवं पड़वा ढोक क्षमा वाणी पर्व मनाया जावेगा।
इस दौरान दिगम्बर जैन मंदिरों में पूजा अर्चना के विशेष आयोजन होगें।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
