आपाधापी व व्यस्तता भरे जीवन मे सरलता खो गयी है, जिसे ढूढ़ने की आवश्यकता है आचार्य विनीत सागर
कामा
के कोट ऊपर स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दसलक्षण महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजा आराधना करते समय आचार्य विनीत सागर महाराज ने कहा की आर्जव यानी सरलता है अर्थात कुटिलता व ईर्ष्या के भावों का अभाव उत्तम आर्जव धर्म है। दस लक्षण महापर्व के प्रथम दिन क्रोध का अभाव कर क्षमा व दूसरे दिन मृदुता धारण कर उत्तम मार्दव धर्म को अंगीकार किया।
आचार्य ने कहा कि तीसरे दिवस उत्तम आर्जव यानी सरलता वैसे तो आर्जव का शाब्दिक अर्थ आसान, ऋजुता, सहजता, भोलापन, सीधापन धारण करना और कुटिलता का अभाव आदि अनेक शब्दों से जाना जाता है। परंतु सरलता है कहां? लगता है सरलता तो कहीं खो गई है। आज सरलता वह दुर्लभ चीज हो गई है जो कहीं भी दिखाई नहीं पड़ती है। बच्चे का उदाहरण देते हुए कहा कि एक बच्चे की मुस्कान सभी को प्यारी लगती है। क्योंकि उसमें सरलता है मासूमियत है बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है। आज के तनाव व व्यस्तता भरे माहौल में जहां चारों ओर पैसे कमाने की आपाधापी एक दूसरे से आगे निकलने की होड़, अपने आपको अत्यधिक विशेष दिखाने की होड़, बचपन से ही बच्चों में कंपटीशन की भावना इसलिये सरलता तो बचपन से ही गायब हो चली है। हर चेहरे पर स्वार्थ का भाव दिखाई देता। स्वार्थ एवं कुटिलता का त्याग कर जितना हो सके उतना सरल बनने का प्रयत्न करना चाहिए।
जैन समाज से प्राप्त सूचना के अनुसार दसलक्षण महापर्व के तृतीय दिवस दसलक्षण महामंडल विधान में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य विजय जैन वैभव जैन अनुभव जैन तेल वाले परिवार एवं जगदीश प्रसाद योगेश कुमार,बिपिन कुमार जैन बानमुझ वालों को प्राप्त हुआ। तो इस अवसर पर बह्मचारीणी मणी दीदी झांसी ने कहा कि मन को निर्मल बनाकर अंतरंग और बहरंग दोनो से व्यक्ति को समान होना चाहिये अर्थात जो मन में हो वही आपके काया वचन में परिलक्षित होना चाहिए।
सकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
