मनुष्य के उत्थान में विचारों का अत्यंत महत्व है, उत्तम व शुभ विचार मनुष्य को निरंतर प्रगति के मार्ग पर ले जाते हैं आर्यिका विज्ञा श्री

JAIN SANT NEWS निवाई

मनुष्य के उत्थान में विचारों का अत्यंत महत्व है, उत्तम व शुभ विचार मनुष्य को निरंतर प्रगति के मार्ग पर ले जाते हैं आर्यिका विज्ञा श्री

निवाई

परम पूज्याभारत गौरव लआर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में निवाई शहर में चल रहे 48 दिवसीय जिनसहस्त्रनाम महामंडल विधान में प्रातः अभिषेक,शांति धारा, अष्टद्रव्यो से पूजा के बाद विधान मंडल की पूजा हुई।

जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया की कार्यक्रम के अंतर्गत आर्यिका श्री ने भरी धर्म सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा की मनुष्य विचारों की पुंज है किसी भी व्यक्ति की पहचान सज्जन,दुर्जन, शिष्ट,अशिष्ट ,साधु और असाधु संयमी असंयमी की पहचान इन विचारों से ही की जा सकती है मनुष्य जो कुछ मन में सोचता है वही वाणी से कहता है वैसे ही कर्म करता है। जिस प्रकार के कर्म करता है उसी प्रकार बन जाता है | ऋग्वेद में कहा गया है “सामानों मंत्र समिति समानं मन सह चित्तमेषाम” इस मंत्र का आशय यह है कि परमात्मा ने सभी को समान सुविधाएं दी है और समान उपकरण दिए हैं मनुष्य का कर्तव्य है उस दी गई सुविधाओं का समुचित प्रयोग करते हुए उन्नति करें | इसके लिए विचारों की एकता व भावनाओं का समन्वय आवश्यक है अर्थवेद मंत्रों के माध्यम से कहा गया कि लक्ष्य की पूर्ति के लिए एकता अनिवार्य है तथा संकल्प विचार और उद्देश्य भी समान होना आवश्यक है | समाज को सुसंगठित करने के लिए समान विचार समान कर्म और समान लक्ष्य इन तीन तत्वों की आवश्यकता होती है यह भावना सद् विचारों से ही आ सकती है | शुभ विचारों से ही एक-दूसरे के हित चिंतन की भावना उत्पन्न कर समाज शुद्ध होता है। विधा और तप से आत्मा शुद्ध होती है ,मानव जीवन अभ्युदय और नि : श्रेयस के लिए है | अभ्युदय का अर्थ मोक्ष के सुख से है मनुष्य का मन सुख विचारों से युक्त होने पर व्यक्ति आनंदित होता है | मनुष्य के उत्थान में विचारों का अत्यंत महत्व है उत्तम व शुभ विचार मनुष्य को निरंतर प्रगति के मार्ग पर ले जाते है ।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *