मनुष्य पर्याय को सार्थक बनाने के लिए गुरु आवश्यक है– मुनि श्री प्रशस्तसागर

JAIN SANT NEWS बंडा

मनुष्य पर्याय को सार्थक बनाने के लिए गुरु आवश्यक है– मुनि श्री प्रशस्तसागर

बंडा

मंगल धाम में विराजमान मुनि श्री प्रशस्तसागर महाराज जी ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सभी व्यक्तियों को अपने जीवन में एक ऐसा गुरु बनाना चाहिए जिससे हम सभी का इस संसार से कल्याण हो सके, क्योंकि यह संसारी प्राणी अनादि काल से 84 लाख योनि से चक्कर लगा रहा है और अनादि काल से अनेक कष्टों को भोग रहा है फिर भी मनुष्य पर्याय को सार्थक करने के लिए हमारे लिए अपने जीवन में एक गुरु की आवश्यकता होती है। जो मोक्ष मार्ग प्रशस्त कर सके हमारे जीवन में मिथ्या रूपी अंधकार को दूर करने के लिए गुरु ही एक सहारा है जो हमारे लिए हमारे अंदर बैठा हुआ मिथ्या रूपी अंधकार को दूर कर सकता है।

सम्यक रूपी प्रकाश को हमारे जीवन में भर सके, मुनि श्री ने कहां की है कि वर्षा ऋतु मैं जीवो की उत्पत्ति होती है, हमारे द्वारा किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचे इसलिए साधु संत एक स्थान पर चार महीने के लिए चतुर्मास करते हैं। अपनी साधना में लीन रहते हैं। व्यक्ति को चार माह तक धर्म की आराधना करना चाहिए। संत समागम मिला है अतः हमें उसका लाभ लेना चाहिए। संत ही एक ऐसे गुरु हैं जो हमारे जीवन को शुरू कर सकते हैं। चार महीने में जो धर्म की आराधना होती है वह संत समागम के माध्यम से ही हो सकती है।

जो हमारे जीवन को परिवर्तित कर सकती है। सच्चे गुरु मिलना बहुत दुर्लभ है। हम सभी का सौभाग्य है कि ऐसी पंचम काल में आचार्य श्री विद्यासागर जैसे गुरु हम सबको मिले हैं। हम सब का सौभाग्य है कि हमने उनके काल में जन्म लिया है। संसारी प्राणी को अपने जीवन में धर्म की आराधना करते रहना चाहिए। प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण करने का परम सौभाग्य जयकुमार पटारी व प्रमोद झागरी को प्राप्त हुआ। ज्ञानदीप का प्रज्जवलन अभिषेक झागरी, पुष्पेंद्र झागरी विशाल बमाना, छोटेलाल बमाना आशीष कंदवा, अशोक शाकाहार, संदीप पिड़रुवा, आदि ने किया। शास्त्र भेंट करने का परम सौभाग्य बाहर से आए श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। प्रवचन सभा का संचालन वास्तुविद ब्रह्मचारी निलेश भैया एवं संपादन अशोक “शाकाहार” ने किया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *