भाग्यहीन को भगवान की शरण नहीं मिलती-मुनि पुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज थूबोनजी में ग्यारह मंजिला सहस्त्र कूट का शीघ्र होगा शिलान्यास
अशोक नगर–
आज जरूरत है दूसरों के दुखों को मेटने का काम श्रेष्ठ भावना से करने की। कार्य ना करने पर भाव तो सभी कर सकते हैं। लेकिन लोग इसमें भी कंजूसी करते हैं। जो दूसरों की मदद करें वही भाग्यवान हैं,क्योंकि भाग्यहीन व्यक्ति को भगवान की शरण नही मिलती, भगवान की शरण पाने के लिए पुरुषार्थ के साथ भाग्य का होना आवश्यक है। जिसे जगत पुण्य के रूप में जानता है। ।
यह उद्गार निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने जिले की सीमा से लगे ललितपुर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

मुनि श्री से लिया क्षेत्र कमेटी ने दिशा निर्देशन
दर्शनोदय तीर्थ थूबोनजी कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने बताया की थूबोनजी में बनने वाले सहस्त्र कूट जिनालय का निर्माण ज्ञानोदय तीर्थ में कार्यरत श्री सोमपूरा द्वारा परम पूज्य मुनि पुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज के निर्देश में अंतिम रूप दिया जा रहा है। सहस्त्र कूट जिनालय का शीघ्र शिलान्यास होगा। इस हेतु कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन टिंगू मिल, उपाध्यक्ष राकेश अमरोद, महामंत्री विपिन सिंघई, पूर्व महामंत्री राकेश कांसल,निर्माण मंत्री विनोद मोदी, मंत्री राजेन्द्र हलवाई, कोषाध्यक्ष सौरव बाझल, आडीटर राजीव चन्देरी संरक्षक शैलेन्द्र दददा, सुनील अकाली, नीलू मामा, नितिन बज सहित अन्य भक्तों ने श्रीफल भेंट किये।

जो दूसरों के दुखों को मेटने का श्रद्धा भाव रखे वहीं मानव सुखी हैं
मुनिश्री ने कहा कि एक क्षण का त्याग जन्मों जन्मों का पुण्य संचय कर व्यक्ति को महान बना सकता हैं। और वहीं दे सकता है आपको उत्तम परिणाम। क्योंकि सब कुछ किया लेकिन पुण्य कार्य निमित्त में नहीं आए क्या कारण हैं? यही हमारी जो सोच होती है।वह चिंतन की हो चिंता युक्त नहीं। कुछ पुण्यार्थी ऐसे भी हैं जो पुण्य कार्य करते हैं, लेकिन सभी पुण्य क्षीण हो जाता हैं।जैसे भस्मासुर रोग होता है, जो खाया सब कुछ भस्म। सोचो और चिंतन करो कि क्या कारण हैं? क्या कमी हैं? हमारे पुण्य में, जो पुण्य प्रभावशाली नहीं हो रहा है।

सदैव सकारात्मक सोच से काम करें
उन्होंने कहा कि मात्र श्रद्धा भाव से महामंत्र णमोकार जी का उच्चारण हमारे समस्त कष्टों का परेशानियों का निवारण है। हमारे जीवन में दो प्रकार की शक्तियां आती है, एक नकारात्मक और दूसरी हैं सकारात्मक। जो हम पल पल नकारात्मक सोच रखते हैं वह हमारी शक्तियों को क्षीण कर देती है, इसलिए सदैव सकारात्मक सोच से पल पल सोचो। क्योंकि हमारा पुण्य प्रताप तभी प्रभावशाली बनेगा। भगवान के चरणों में पहुंचकर हमें उनके वैभव उनके यश कीर्ति को देखकर प्रसन्न होना चाहिए। और सब कुछ भूल कर उनका गुणगान करने में लग जाता है। जिससे चमत्कार होता है। और पुण्य का संचय होने लगता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
