बच्चो को संस्कार देना अत्यंत आवश्यक है अक्षय साग़र महाराज
गुना
पूज्य मुनि श्री अक्षय सागर महाराज ने अपने उद्बोधन मे संस्कार के विषय पर प्रकाश डाला उन्होने निज की प्रभावना के वनस्पद जिन प्रभावना सर्वश्रेष्ठ बताया कभी भी भगवान को कर्ता नहीं माना है और जैन धर्म की मान्यता का उल्लेख करते हुए कहा की जैन धर्म की मान्यता मे जो आपने इस धरती पर कर्म किए हैं, उनको आपको भोगना ही पड़ता है। एक उदाहरण से समझाया की जिस तरह दूध में से घी निकल जाए तो वापस दूध नहीं बन सकता है। उसी प्रकार यदि एक बार आत्मा शुद्ध हो जाए तो वापस सांसारिक कष्टों में मनुष्य नहीं पड़ता है। प्रभु के दर्शन मात्र से अपने कर्मों की निर्जरा करके मनुष्य पतित से पावन बन सकता है। एक बार निज दर्शन होने के बाद मनुष्य सांसारिक भ्रमण से दूर हो जाता है, एक बार यदि परमात्मा में मन लग जाए तो किसी की ओर व्यक्ति का ध्यान आकर्षित नहीं होता और व्यक्ति का आत्म कल्याण होना निश्चित होता है। उन्होने बच्चों के संस्कार देने को अत्यंत आवश्यक बताया। इस पर विशेष बोलते हुए कहा की संस्कार के बिना कभी धर्म टिक नहीं पाता और न ही इस संसार का विकास हो पाता है। अतः संसार और परिवार के विकास के लिए संस्कारों का होना अत्यंत आवश्यक है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
