न गुरु के मन से हम दूर होते हैं और न ही हम गुरु से दूर होते हैं द्रढ़मति माताजी

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न गुरु के मन से हम दूर होते हैं और न ही हम गुरु से दूर होते हैं द्रढ़मति माताजी

आर्यिका 105 द्रढ़मति माताजी ने उदासीन आश्रम मे चातुर्मास कलश स्थपना समारोह मे बोलते हुए कहा की कई शहरों,व गांव, तीर्थक्षेत्रों आदि में मुनि महाराज आर्यिका संघों के चातुर्मास हो रहे हैं। उन्होंने कहा सभी भाग्यशाली हैं। जो ऐसा अवसर हमको मिला है उन्होने आचार्य श्री के विषय मे बोलते हुए कहा की अंतरिक्ष पारसनाथ शिरपुर से आचार्यश्री के आशीर्वाद के रूप में ऊर्जा यहाँ पहुंच रही है। माताजी ने गुरु गुणानुवाद करते हुए कहा कि आचार्यश्री के आशीर्वाद से श्रमण संघ, आर्यिका संघ, छुल्लक संघ, साधिका छुल्लिका संघ पर कृपा बरस रही है। साथ ही भाव विहल शब्दों मे उन्होने कहा न गुरु के मन से हम दूर होते हैं और न ही हम गुरु से दूर होते हैं। हम सभी का जीवन धन्य है। जिसे सुन सभी भाव विभोरहो गए उन्होने विशेष व्याख्या करते हुए कहा आचार्य श्री ने बुंदेलखंड की धरा पर दक्षिण से आकर धर्म ध्वजा फहराया है। हर घर में ज्ञान की ज्योति प्रकाशित हो रही है और धर्म ध्वजा फहरा रही है। पूज्य माताजी का वर्षायोग 2006 में मोराजी में हो चुका है आर्यिका संघ मे वर्तमान में 10 माताजी हैं। मिली जानकारी अनुसार उदासीन आश्रम में शुरू हुआ साधिका आश्रम सागर में अनंत ऊंचाइयों को पा रहा है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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