जंगल मे मंगल वात्सलय वारिधि का कल गंगापुर प्रवेश
जब भगवान महावीर की दिव्य देशना योग्य गणधर के अभाव में नही हुई तब इंद्र ने गणधर के लिए इंद्र भूति ब्राह्मण को भगवान के समवशरण लाये मान स्तम्भ देख कर श्री इंद्र भूति का मान गलित हुआ और उन्होंने गणधर बन कर भगवान की दिव्य ध्वनि प्रसारित की ।यह उदबोधन वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने महती धर्म सभा मे प्रगट किये।
सच ही लिखा है कि जिन मार्गो पर पंच परमेष्ठियों का विहार होता है पूर्व में देवता नगरी बना देते थे
वह परम्परा कायम है जैन धर्म का महत्वपूर्ण पर्व गुरु पूर्णिमा वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के ससंघ सानिध्य में गंगापुर सिटी से दूर ग्राम में जहाँ एक भी जैन परिवार नही है उस ग्राम में राजस्थान के अनेक नगरों के हजारों श्रद्धालुओं ने ग्राम को जैन नगरी बना दिया।
वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री का सुबह 8,3 KM विहार करहि झोपड़ी ग्राम में आगमन हुआ।आहार के बाद आयोजित धर्मसभा
कार्यक्रम का शुभारंभ बा ब्रह्म नेहा दीदी पूनम दीदी दीप्ति दीदी के सुमधुर मंगलाचरण से हुआ। गंगापुर मुनि सेवा संघ सोशल ग्रुप के पदाधिकारियों ने प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी का चित्र अनावरण कर दीप प्रवज्जलन किया। चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी एवम परम्परा के सभी पूर्वाचार्यो को विभिन्न नगरों की समाज ने अर्ध समर्पित किये।
पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी की विशेष द्रव्यों से पूजन संघस्थ नेहा पूनम एवम दीप्ति दीदियों ने करवाई
आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन एवम शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य गंगा पुर समाज के मुनि सेवा संघ एवम सोशल ग्रुप कोमिला। कार्यक्रम का संचालन श्री नरेन्द्र जी गंगापुर ने किया
कार्यक्रम पश्चात आचार्य श्री संघ का बिहार 6,3 KM हुआ।
रात्रि विश्राम शासकीय स्कूल मालियों की चौकी पर है
दिनांक 14 जुलाई को आचार्य श्री 9 KM बिहार करेंगे
आहार चर्या खंडेलवाल भवन गंगापुर सिटी में होगा
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
