धनार्जन के दौरान अर्जित हुये पापों के प्रक्षालन के लीये खुले हाथ से दान दें- आर्यिका अर्हं श्री माताजी
आगरा,
छह प्रकार के पापों को धोने के लीये कीये जाते हैं 6 आवश्यक कर्त्तव्य, नित्य क्रियाओं मे “कूटने” के दोषों से लगे पापो से बचने के लीये पूजन चक्की “पीसने” आदि दोषों के पापों से बचने के लीये उपासना*, “चूल्हे/ बिजली जलाने” से हुई हिंसा के पापो से बचने के लीये स्वाध्याय, जल ढुलाने से हुये पापों से बचने के लीये संयम झाडू आदि लगाने के पापों से बचने के लीये तप*और धनार्जन करने मे हुये पापों ( हिंसा, झूठ,चोरी, कुशल और परिग्रह) से बचने के लीये खुले हाथ से दान* देना चाहीये! उपरोक्त पाप हर व्यक्ती से क्रत, कारित,अनुमोदना से होते हैं, इसीलिये आचार्यो ने नित्य षट आवश्यक कर्त्तव्य करने का उपदेश दीया है !
उक्त उद्गार कमलानगर आगरा के श्री महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर पर आयोजित प्रात: कालीन प्रवचन सभा में अर्हंश्री माताजी ने दीये! माताजी के प्रवचन प्रात: 8.30 से 9.30 , व सांय 7.00 से 7.45 तक हो रहे हैं! व .13 जुलाई को हरीपर्वत आगरा के एम डी जैन कालेज के शातिसागर सभागार में माताजी का मंगल कलश स्थापना एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव, प्रात: 8.30 से आयोजित होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
