आज का दिन श्रमण संस्कृति के इतिहास का अनूठा दिन है प्रमाण सागर महाराज

JAIN SANT NEWS सम्मेद शिखर

आज का दिन श्रमण संस्कृति के इतिहास का अनूठा दिन है प्रमाण सागर महाराज

पारसनाथ

पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का दीक्षा दिवस मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज व मुनि श्री अरहसागर जी महाराज के सानिध्य मे मनाया गया इस अवसर पर आचार्य श्री भक्ति भाव के साथ अष्ट द्रव्य समर्पित कर पूजन की गयी इन मांगलिक पलो पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज गुरु केविषय पर प्रकाश डालते हुए कहा आज का दिन श्रमण संस्कृति के इतिहास का अनूठा दिन है आज के दिन आचार्य महाराज की दीक्षा हुयी और उन्होने अपनी दीक्षा को सार्थक किया उन्होने आज अपनी दीक्षा के 54वर्ष पूर्ण और 55 वे वर्ष मे प्रवेश किया उन्होने कहा मरी द्रष्टि मे गुरुदेव ने केवल दीक्षा ही नहीं ली अपितु आज से एक नए युग की शुरुआत की जिस समय गुरुदेव की दीक्षा हुयी उस समय देश मे मुनियों की संख्या बहुत थोड़ी थी और समाज मे मुनियों के प्रति श्रद्धा भी बहुत कम थी लेकिन गुरुदेव ने जबसे दीक्षा धारण की तबसे मुनियों की संख्या भी बहुत बड़ी है और मुनियों का मान भी बढ़ा है उन्होने कहा पहले के समय मे जो मुनि होते थे वो बुजर्ग होते थे जितने भी त्यागी होते थे वो ज्यादा ज्ञानी नहीं होते थे गुरुदेव ने ज्ञानसागर जी महाराज की आशीष से इस कमी को पूरा किया और   जवान मुनियों के साथ ज्ञानियों की एक टीम खडी कर दी

एक स्मरण को सुनाया

उन्होने कहा मुझे एक संस्मरण स्मरण मे आ रहा है पंडित कैलाशचंद शास्त्री जिसे उन्होने गुरुदेव के प्रथम दर्शन के प्रतिक्रिया स्वरुप लिखा था एक नए नक्षत्र का उदय जब उन्होने पहली बार गुरु के दर्शन किये तो वो बडे प्रभावित हुए उन्होने कहा मेरी तो मुनियों से श्रद्धा उठ गयी लेकिन जबसे मेने आचार्य भगवंत के दर्शन किए मुझे णमोकार के पांचो पद सार्थक दिख रहे है उन्होने लिखा की मै अपने तमाम मित्रो से कहता हु जिनकी मुनियों के प्रति श्रद्धा नहीं है एक बार आचार्य भगवंत के दर्शन करे उनकी धारणा निश्चय से परिवर्तन होगी मुनि श्री ने कहा यह हम सबका सोभाग्य है ऐसी महान विभूति के शासन काल मे हमने जन्म लिया न केवल जन्म लिया अपितु उनका आशीर्वाद व उनका शिष्यत्व को पाया उन्होने कहा आज से 50 से 70 साल पूर्व देश मे मुनियों का अभाव था बहुत कठिन थे साधुओ के दर्शन उन्होने कहा चारित्र चक्रवती आचार्य शांतिसागर महाराज ने मुनि मार्ग को उदित किया तो गुरुदेव ने उसे पल्लवित किया उन्होने कहा मै तो यह समझता हु की यदि आचार्य भगवंत का अविर्भाव नहीं होता तो समस्त परम्परा अनाथ हो जाती ये बहुत बड़ी क्रपा और ये हम सबका सोभाग्य है ऐसे महान विभूति के आज 55 वे मुनि दीक्षा महोत्सव को हम सम्पन्न करने जा रहे है उन्होने कहा गुरुदेव के विषय मे जितना कहू कम है उन्होने कहा दीक्षा लेना कोई सहज काम नहीं अंनंत जन्मो के पुण्य अब फलता है तब कोई दीक्षा ले पाता है गुरुदेव ने आज दीक्षा ली वो उनके अनत अंनत जन्मो के पुण्य का सुफल था उन्होने कहा हमे भी सोभाग्य मिला है दीक्षा लेने का दीक्षा कोई वस्तु नहीं है जो कही से लाकर दे दी जाए दीक्षा लेना बहुत दुर्लभ काम है आचार्य भगवंत उन्हे दीक्षा देते है जो उनकी कसोटी पर खरा उतरता है उन्होने कहा यदि दीक्षा का कोई फल है तो वह है समाधी है पूज्य गुरुदेव ने 54 वर्ष की श्रमण साधना मे अपने अन्दर वह सब कुछ समाहित किया है वे साधना मे इतने तपे की वे तपते तपते तप बन गए इतना चले की चलते चलते सबके लिए राह बन गए जो त्याग तप के बल पर जैन धर्म की पर्याय बन गए मै इनके दीक्षा दिवस पर यही भावना भाता हु की है गुरुदेव आप इसी तरह हम सब पर अपनी चरण छाया आप दीर्घायु हो आप स्वस्थ हो और अगर आयु लखती हो हम सबकी आयु भी आपको लग जाए

अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी.

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *