आर्यिका 105 विनीत मति माताजी समाधी दिवस पर भाव भीनी विनयांजलि
परम पूज्या गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री 105 विशुद्धमति माताजी की परम शिष्या थी आर्यिका 105 विनीत मति माताजी आपका जीवन त्याग संयम की और अग्रसर था यु कहे आप स्व और पर के कल्याण की भावना से अपना जीवन व्यतीत करती थी उनकी करुणा स्नेह सदा सदा हम पर बना रहता था वोह मंद मुस्कान स्नेह आशीष की छाव सदा सदा स्मृति पटल पर बनी रहेगी कुछ शब्द सोम छवी आँखों मे करुणा हित मित प्रिय वाणी थी अमृत धार बही जो जन जन कल्याणी थीआर्यिका माताजी 4-7-2013 को बडनगर जिला उज्जैन मे यम सलेखना सहित समाधी को प्राप्त हुयी थी तब पुष्पगिरि तीर्थ प्रणेता आचार्य पुष्पदन्त सागर जी महाराज वहाँ उपस्तिथ रहेभाव भीनी विनयांजलि सहितपदमकुमार जैन सुलोचना जैन अभिषेकएवम समस्त लुहाडिया परिवार
रामगंजमंडी
