आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के 33 वे आचार्य पदारोहण वर्ष दिवस पर विशेष

JAIN SANT NEWS

श्री शांति वीर शिव धर्माजीत वर्द्धमान सुर्रिभ्यो नमः
श्री शांति सिंधु सी निर्भयता
हो वीर सिंधु सी निर्मलता
श्री शिव सागर जी सा अनुशासन
हो धर्म सिंधु सी निस्पहता
संयत वाणी चिंतन शक्ति
हो अजित सुरिवर सी दृढ़ता
इन गुणों का संचय हो
वर्द्धित हो मन की मृदुता
हो मार्ग आपका निष्कंटक
यशवती बने यह परम्परा
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के 33 वे आचार्य पदारोहण वर्ष दिवस 24 जून 1990 आषाढ़ सुदी दूज एक जुलाई 2022 पर जीवन परिचय,

आओ शांति मार्ग पर चले.

20 वी सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री 108 शांति सागर जी महाराज* की अक्षुण्ण पट्ट परम्परा में तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री 108 धर्म सागर जी से दीक्षित मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के *पंचम पट्टाधीश राष्ट्र गौरव वात्सल्य वारिधि तपोनिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज* को त्रिकाल नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु भरत चक्रवती के नाम पर अवतरित भारत देश के राज्य मध्यप्रदेश में कई भव्य आत्माओं ने अवतरित होकर श्रमण मार्ग अपनाया है । वही इसी राज्य के खरगौन जिले के सनावद नगर जो कि सिद्ध क्षेत्र श्री सिद्धवरकूट, श्री सिद्धक्षेत्र पावागिरी ऊन, श्री सिद्ध क्षेत्र चूलगिरी बावनगजा बड़वानी के निकट है। इन सभी सिद्ध क्षेत्रों से करोड़ो मुनि मोक्ष गए है। प्रातः स्मरणीय प्रथमा चार्य चारित्र चक्रवर्ती परमपूज्य 108 आचार्य श्री शांतिसागर जी गुरुदेव की अक्षुण्ण पट्ट परम्परा में तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज से दीक्षित जिनधर् प्रभावक राष्ट्र गौरव पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री108 वर्द्धमान सागर जी सहित सहित 16 साधु भगवंतो व अनेक प्रतिमा धारी ब्रह्मचारी भैय्या व ब्रह्मचारिणी बहिनों की गौरवशाली जन्म भूमि, कर्म भूमि, समाधि भूमि ऐसी पवित्र धर्म प्राण नगर सनावद में पर्युषण पर्व के तृतीय दिन उत्तम आर्जव दिवस पर एक प्रतिभा शाली कुल परिवार नगर का मान बढ़ाने वाले यशस्वी बालक यशवंत का जन्म माता श्रीमती मनोरमा देवी जैन की उज्जवल कोख से प्रसवित हुआ। आपके पिता कमलचंद जैन जिनकी उपजाति पोरवाड़ है। इसे विधि का विधान ही कहेंगे,की 18 सितम्बर 1950 भाद्रपद शुक्ल सप्तमी संवत 2006 को अवतरित होने से पूर्व भाग्यशाली सौभाग्यशाली पुत्र से पूर्व 8 पुत्र 4 पुत्रियां असमय काल का ग्रास हुई ।

मंदिर की 108 परिक्रमा एवम उल्टा स्वस्तिक बनाना

रिश्तेदारों की सलाह अनुसार गर्भस्थ शिशु के जीवन की लंबी अवधि के लिए माता पिता ने श्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र में श्री महावीर स्वामी के मंदिर की 108 परिक्रमा लगाकर मंदिर की दीवारों पर उल्टा स्वस्तिक बनाया तथा मन्नत ली कि बालक के केश जमाल यही उतारेंगे।

माता का वियोग

जब आपकी उम्र मात्र 12वर्ष की थी तब आपकी माता जी का असामायिक निधन हुआ। गुरु दर्शन वही आपने सन 1964 में बावनगजा बड़वानी में आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज और आचार्य श्री महावीर कीर्ति जी महाराज के दर्शन किये । साथ ही सन 1964 में तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज के सनावद में मुनि अवस्था के दर्शन किये।। वही 1965 में आर्यिका श्री इंदुमती माताजी का सनावद चातुर्मास हुआ ।जीवन मे आपके एक ऐसा क्षण आया, वही सन 1967 में आर्यिका श्री ज्ञानमति माताजी का सनावद चातुर्मास हुआ ।

व्रत नियम

संयम पद पथ पर कदम रखते हुए आपने सन 1967 में श्री मुक्तागिर सिद्ध क्षेत्र में आर्यिका श्री ज्ञानमति माताजी से *आजीवन शूद्र जल* त्याग और 5 वर्ष का *ब्रह्मचर्य व्रत* लिया । यही से उनका संयम का मार्ग बलवती हुआ।वो यही नही रुके उन्होंने
जनवरी 1968 बागीदौरा राजस्थान में आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज से *आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत* अंगीकार किये ।

ग्रह त्याग

आपने ग्राम करावली में सर्व प्रथम आचार्य श्री शिव सागर जी के दर्शन किये । सनावद वासियो के साथ श्री गिरनार जी एवम बुंदेलखंड की तीर्थ यात्रा कर। बालक यशवंत वापस सनावद आ गए ।वसन 1968 को श्री यशवंत पुनः ग्राम पालोदा में आचार्य श्री शिव सागर जी के दर्शन हेतु गए। मई 1968 से आप संध में शामिल हो गए । भीमपुर जिला डूंगरपुर में आपने द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी महाराज से *गृह त्याग* का नियम लिया ।

दीक्षा हेतु श्रीफल भेंट

जब बाल ब्रह्मचारी श्री यशवंत जी ने मात्र 18 वर्ष की उम्र में फागुन कृष्णा चतुर्दशी संवत 2025 सन 1969 को *श्री महावीर जी* मे *आचार्य श्री शिव सागर जी महाराज* को मुनि दीक्षा हेतु श्रीफल चढ़ा करके निवेदन किया । तब आप गुरुदेव के आदेश से अगले दिन श्री सम्मेदशिखर जी की यात्रा पर गए। तब अकस्मात आचार्य श्री शिव सागर जी महाराज की अनायास *समाधि फागुन कृष्णा 30 संवत 2025* को श्री महावीर जी मे होने के कारण पुनः नूतन आचार्य तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज को दीक्षा हेतु श्रीफल भेंट किया ।

मुनि दीक्षा

होना क्या था तृतीय पट्टाधीश नूतन आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज ने श्री महावीर जी मे *फागुन शुक्ला 8 संवत 2025* 24 फरवरी 1969 को 6 मुनि 3 आर्यिका तथा 2 क्षुल्लक कुल 11 दीक्षाएं आपके सहित दी । अब ब्रह्मचारी श्री यशवन्त मुनि दीक्षा धारण कर *मुनि श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज बन गए ।

उपसर्ग नेत्र ज्योति का जाना

मुनि श्री वर्धमान साग़र जी महाराज पर एक उपसर्ग आया बात उन दिनों की जब श्री महावीरजी से आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज का विहार जयपुर

खानिया जी हुआ तब ज्येष्ठ

शुक्ला 5 पंचमी संवत 2025 सन 1969 को अनायास नव दीक्षित मुनि श्री वर्धमान सागर जी महाराज की नेत्रों की रोशनी चली जाती है। उस समय उम्र मात्र 19 वर्ष की थी। उसी समय डॉक्टर बुलाये गए,और अगले दिन डॉक्टरों ने नेत्रों का परीक्षण किया। तब डॉक्टरों ने परामर्श दिया कि बिना इंजेक्शन लगाए नेत्र ज्योति आना नामुमकिन है । इस हेतु संघ में विचार विमर्श होने लगा कि मात्र 19 वर्ष की उम्र में इतना उपसर्ग, क्या किया जावे?वही चर्चाओं में दीक्षा छेद कर डॉक्टरी इलाज कराने की भी चर्चा चली । तब मुनि श्री वर्धमान सागर जी महाराज के कानों में चर्चा पहुँचने पर उनहोंने कहा कि में इंजेक्शन नही लगवाएगे और प्रसंग आने पर *समाधि ले लेंगे* । तब मुनि श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने 1008 श्री चंद्र प्रभु की वेदी पर मस्तक रख कर पूज्य पाद रचित *श्री शांति भक्ति का पाठ स्तुति* प्रारम्भ की वो लगातार *2 दिन* अर्थात *52 घण्टे बाद* प्रभु भक्ति के प्रभाव से बिना डॉक्टरी इलाज *नेत्र ज्योति वापस* आ जाती है । इस घटना के समय आचार्य श्री धर्म सागर जी सहित 17 मुनि 25 आर्यिकाये 4 क्षुल्लक एवम 1 क्षुल्लिका सहित 47 साधु विराजित थे।
वही यह भी कहा जाता है परम पूज्य आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी जी आकाश गमनी विद्या से आकाश में गमन कर रहे थे, तब सूर्य की प्रचंड तेज रोशनी से आचार्य श्री की नेत्र ज्योति जाने पर श्री पूज्य पाद स्वामी ने श्री शांति भक्ति की रचना कर नेत्र ज्योति वापस पाई थी ।

वही उसी पवित्र शांति भक्ति के पाठ से परम पूज्य मुनि श्री वर्धमान सागर जी महाराज की नेत्र ज्योति वापिस आई । इन पवित्र नेत्रों से जब गुरुदेव का वात्सल्य मयी आशीर्वादमिलता है तो भक्तों का मानव जीवन सफल हो जाता है।

आचार्य पद

अब वो समय आ गया था जबचारित्र चक्रवती प्रथमचार्य श्री 108 शांति सागर जी महाराज*की अक्षुण्ण पट्टपरम्परा के *चतुर्थ पट्टाचार्य श्री 108 अजित सागर जी महाराज* के *पत्र के माध्यम से लिखित आदेश* अनुसार *पारसोला राजस्थान में 24 जून 1990 आषाढ़ सुदी दूज* को आचार्य पद गुरु आदेश अनुसार दिया गया। आपने आचार्य पद के बाद वर्ष 1990 से वर्ष 2021 तक विभिन्न तीर्थ क्षेत्रो अतिशय क्षेत्रो प्रदेश राजधानियों महानगरों सिद्ध क्षेत्रो निर्वाण भूमियों आदि में दर्शन किये। वही वर्ष 2022 का चातुर्मास *श्री महावीर जी राजस्थान में संभावित है।
आपके द्वारा दी गई दीक्षाएं वात्सलय वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी गुरुदेव ने अभी तक 8 9 दीक्षाये दी है ।
जिनका क्रम इस प्रकार मुनि दीक्षा -32 आर्यिकाए दीक्षा33 ऐलक दीक्षा 01क्षुल्लक दीक्षा 13 क्षुल्लिका दीक्षा 10कुल 89
आपका आचार्य पदारोहण पुण्यार्जक नगर/क्षेत्र
उन स्थानों का वर्णन जिन स्थानो को आचार्य श्री के आचार्य पदारोहण दिवस मनाने का स्वर्णिम अवसर मिला 1991 गिगला, 1992 तलोद, 1993 होस दुर्ग. 1994 श्रवणबैलगोला, 1995 सांगली, 1996 उदयपुर, 1997 सलूंबर.1998 भीलवाड़ा,1999लूणवा नागौर,2000 निवाई, 2001 धरियावद,
2002 उदयपुर,2003 भींडर,2004 पारसोला,2005 श्रवणबैलगोला,2006 तिरूमले, 2007 श्रवण बेलगोला,2008 सम्मेद शिखरजी .2009चंम्पापुर,2010 कोलकत्ता, 2011 सम्मेदशिखरजी,2012आहार जी मध्यप्रदेश
2013 कुंडलपुर(मध्यप्रदेश,)2014 किशनगढ़,2015 निवाई; 2016 सिद्धवरकूट. 2017 श्रवण बेलगोला ,2018 श्रवणबैलगोला,2019 कोथली कर्नाटक,2020बेलगोला व 2021 कोथली कर्नाटक

रजतकीर्ति महोत्सव

किशनगढ़ राजस्थान में आपका 25 वा आचार्य पदारोहण का रजत कीर्ति महोत्सव मनाया गया
चातुर्मास इन राज्यों में किया विहारपट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधिश वात्सल्य वारिधि 108 आचार्य
श्री108 वर्द्धमान सागर जी महाराज ने 12 राज्यों राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, झारखंड, बिहार, बंगाल एवम मध्यप्रदेश में चातुर्मास किये है।
इन सिद्धक्षेत्रो व तीर्थ क्षेत्रों की वन्दना कीश्री तारंगा जी 1श्री सम्मेद शिखर जी 2 श्री चंम्पापुर 1 श्री कुंडलपुर 1श्री सिद्धवरकूट 1अतिशय क्षेत्र श्री पदमपुरा 1श्री लूणवा नागौर। श्री अणिदा पार्श्वनाथ 1श्री श्रवण बेलगोला। 6श्री कुम्भोज बाहुबली। 1श्री पपौरा जी 1तपोभूमि आचार्य श्री कुंद कुंद स्वामी की तपोभूमि पोन्नूर मले महानगर दिल्ली 2 कोलकत्ता 1
आपके अधिकांश चातुर्मास स्थली किसी आचार्यो की मुनियों की उन्मभूमि व पावन स्थली रही है। आपको बता दे वर्तमान में श्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र के लिए विहार चल रहा है। वर्ष 2022 का चातुर्मास श्री महावीर जी संभावित है।

3 बार महामस्तकाभिषेक

प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधिश होने के कारण वर्ष 1993 वर्ष 2006 तथा वर्ष 2018 में 1008 श्री बाहुबली भगवान का महामस्तकाभिषेक आपके मंगल सानिध्य एवम निर्देशन में हुआ है।

समाधि सल्लेखना

आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के संघ में सभी उम्र के साधु हैअभी तक आपने 60 से अधिक साधुओ श्रावक श्राविकाओं की उत्कृष्ट समाधि करवाई हैशास्त्रों में लिखा है कि उत्कृष्ट समाधि होने पर क्षपक जीव अगले 2 भव से 8 भव में सिद्धालय में विराजित होता हैआपने देवकांत सागर जी के यम सल्लेखना के 12 वे दिन संबोधन का वीडियो 1 करोड़ 76 लाख लोगों ने जैन न्यूज उदयपुर के फेसबुक पेज पर देखा हैऐसे विश्व रिकार्ड बहुत ही सहज बन जाते हैपंच कल्याणक प्रतिष्ठायेआपने 33 वर्ष के आचार्य पद के संयम जीवन मे 60 से अधिक पंच कल्याणक प्रतिष्ठाये करवाईअनेक लधु पंच कल्याणक सादगी पूर्ण बहुत ही कम व्यय कर सम्पन्न करवाये जो समाज के लिए आदर्श एवम प्रेरणादायक है

वषों से समर्पित बाल ब्रह्मचारी

जब भी वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का ज्रिक होता है तब श्री गजु भैया का ज्रिक जरूरी है 24 वर्षो से हृदय से समर्पित हैशिष्य का महत्व और अधिक हो जाता है जब आचार्य श्री स्वयम मुक्त कंठ श्री मुख से तारीफ करें गजु भैया ओर आचार्य श्री संघ एक दूसरे के पूरक है अभी भवानीमंडी में भी आपका का श्री परमीत जी का स्वागत किया गया आप लोगो की तन मन धन की सेवा अनुकरणीय एवम प्रशंसनीय है सादर साधुवाद
अब मध्यप्रदेश से भवानीमंडी में ऐतिहासिक भव्य मंगल प्रवेश के बाद राजस्थान में विहार चल रहा है।
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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