मुनि श्री प्रमाण साग़र महाराज 55 वे अवतरण दिवस पर शत शत नमोस्तु

JAIN SANT NEWS

मुनि श्री प्रमाण साग़र महाराज 55 वे अवतरण दिवस पर शत शत नमोस्तु

धर्म बचाओ आन्दोलन के प्रेरक गुणों को आयतन देने गुणायतन तीर्थ प्रेरक मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज आज उनका 55 वा अवतरण दिवस पूरा देश पूरा विश्व हर्षोउल्लास स मना रहा है आज ऐसे प्रभावी और निष्प्रही साधको से हमारा धर्म राष्ट्र सुरक्षित है और गोरवान्वित है।
तुम संतो के संत हो महासंत

जय हो गुरु निर्ग्रन्थ

बात करते आगम सम्मत

तुम हो संतो के संत
मुनि श्री के जीवन चित्रण और परिचय

मुनि श्री 108 प्रमाणसागर जी महाराज

झारखंड प्रान्त के हजारीबाग शहर में जन्मे मुनि श्री प्रमाणसागर जी, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रमुख शिष्यों में से हैं। अल्पवय में ही अंतर्यात्रा की ओर उन्मुख होने वाले मुनिश्री साधना, संयम और सृजन के सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपका चिन्तन और अभिव्यक्ति कौशल हजारों – हजारों श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर भाव-विभोर कर देता है। धारा प्रवाह प्रवचन में शब्द-सौष्ठव एवं प्रस्तुतिकरण की मोहकता, मधुबन में बांसुरी की भांति प्रभावी है। आप हिन्दी, संस्कृत, प्राकृत एवं अंग्रेजी के अधिकारी विद्वान के रूप में बहु-आदरित हैं। अध्ययनप्रियता, आपका पथ व संयम, आपकी शैली एवं साधना आपकी गुणधर्मिता है। आप आगम के गूढ़तम ज्ञाता, जिणवाणी के प्रखर प्रस्तोता हैं। आपकी बहु प्रशंसित कृति “जैन धर्म और दर्शन” विचार, अध्यात्म एवं चिन्तन – जगत में अनुठे अनुदान की भांति सर्वमान्य है। जैन आगम के गूढ़ तत्त्वों की सहज-सरल-सुबोध प्रस्तुति इस कृति का अनुपम वैशिष्ट्य है। “जैन तत्त्व विद्या” आपकी तत्त्वान्वेशी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण है।

संक्षिप्त परिचय

जन्म: 27-6-1967

जन्म नाम: नवीन कुमार जैन

जन्म स्थान:: हजारी बाग ( झारखण्ड)

माता का नाम: श्रीमती सोहनी देवी जैन

पिता का नाम: श्री सुरेन्द्र कुमार जैन

वैराग्य: 4-3-1984

मुनि दीक्षा: 31-3-1988

मुनि दीक्षा स्थान : सिद्ध क्षेत्र सोनागिरी जी

दीक्षा गुरू: संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी

विशेष : मुनिवर श्री प्रमाणसागर जी की प्रेरणा और परिकल्पना से तीर्थराज सम्मेद शिखर में गुणायतन के नाम से बनने जा रहा यह धर्मायतन जैन धर्म के परम्परागत मंदिरों/धर्मायतनों से एकदम अलग एक अद्भुत ज्ञानमंदिर होगा।

ग्रन्थ लेखन : जैन धर्म और दर्शन ,जैन तत्त्वविद्या ,तीर्थंकर ,धर्म जीवन का आधार,दिव्य जीवन का द्वार,ज्योतिर्मय जीवन आदि
विनयांजलि सहित

अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

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