जिसके हृदय में प्रेम और आत्मीयता होती है, उसे सृष्टि के किसी भी प्राणी में हीनता दृष्टिगोचर नहीं होती। संभवसागर महाराज

JAIN SANT NEWS खुरई

जिसके हृदय में प्रेम और आत्मीयता होती है, उसे सृष्टि के किसी भी प्राणी में हीनता दृष्टिगोचर नहीं होती। संभवसागर महाराज

खुरई

प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रेम आत्मीयता पर प्रकाश डालते हुए कहा की दूसरों की स्त्री को जो माता के समान मानता है व दुसरे के धन को पत्थर के समान समझे व समस्त जीवो को अपनी आत्मा के समान  जानता है, देखता है वही ज्ञानी पंडित माना जाता है।

पूज्य मुनि श्री ने प्रकाश डालते हुए कहा जिसके हृदय में सदा  प्रेम और आत्मीयता होती है, उसको सृष्टि के किसी भी प्राणी में हीनता दृष्टिगोचर नहीं होती है।  उन्होने जोर देते हुए कहा जो  भीव्यक्ति प्राणी मात्र में भगवान को नहीं देख पाता है वह कभी भगवान  नहीं बन सकता है। पूज्य मुनि श्री ने भाव भीने उदगार के साथ कहा मंदिर जाकर परमात्मा की पूजा करना शुभ कार्य तो है। परन्तु घर में  रहकर किसी  के प्रति घृणा न रखना किसी शुभ कार्य से कम नहीं माना जाता है।

स्नेह प्रेम के विषय मे मार्मिक उदगार मे उन्हाेंने कहा कि प्रेम रूपी नदी का पानी सदा बहता रहता है व निर्मल भी बना रहता है अगर वह रुक गया तो सडजाता है। सीख देते हुए कहा अपने हृदय सदा में मानवता का दीप जलाओ, सबको गले लगाओ। साथ ही कहा  जब इंसान, हर इंसान को अपने समान समझने लगेगा तब कोई किसी को दुःख पहुंचाने की बात सोचेगा भी नहीं।  वअपने शत्रु में अच्छाई के गुण खोजिए। आप जिससे घृणा करते हैं, उसमें खूबियां ढूंढेंगे तो रचनात्मक शक्ति बढ़ेगी। हमारी सभ्यता के अस्तित्व के लिए यह जरूरी है कि इसे पाने के लिए पहले अपने को समझना होगा, क्योंकि निश्चित ही आप खुद से भी उतने ही अनजान होंगे जितने अपने दुश्मन से। उन्हाेंने कहा कि कोई आपको पसंद नहीं करता या आपकी आलोचना करता है, तो क्यों। कुछ कमी होगी, अतीत में कोई भूल की होगी, जैसे कई कारण हो सकते हैं जिन्हें आप नहीं देख पा रहे होंगे। इसलिए सबसे पहले अपने अंदर झांको। जब कोई व्यक्ति यह समझ लेता है तो उसका नजरिया ही बदल जाता है। अपने को समझने के साथ साथ अपने दुश्मन में अच्छाई के गुण खोजिए। यदि उसे प्यार करेंगे तो उसे हराने का मौका भी पाएंगे। प्यार सृजनात्मक होता है। यह किसी व्यक्ति की नहीं, बुराई की हार में विश्वास करता है।

संकलित अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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