जिसके हृदय में प्रेम और आत्मीयता होती है, उसे सृष्टि के किसी भी प्राणी में हीनता दृष्टिगोचर नहीं होती। संभवसागर महाराज

जिसके हृदय में प्रेम और आत्मीयता होती है, उसे सृष्टि के किसी भी प्राणी में हीनता दृष्टिगोचर नहीं होती। संभवसागर महाराज खुरई प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रेम आत्मीयता पर प्रकाश डालते हुए कहा की दूसरों की स्त्री को जो माता के समान मानता है व दुसरे के धन को […]

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