मन को मलिन होने से बचाने की आवश्यकता है

JAIN SANT NEWS अशोक नगर

मन को मलिन होने से बचाने की आवश्यकता है– आर्यिकारत्न श्रीआदर्श मति माताजी

अशोकनगर–
मन कब मलिनता को प्राप्त हो जाता है हम समझ ही नहीं पाते,मन को मलिन होने से रोकने की आवश्यकता है।

और शरीर को शुद्ध करने के लिए तरह तरह के साबुन सोंडा का प्रयोग करते रहते हैं ये शरीर कभी साबुन सोंडा से शुद्ध होने वाला नहीं है। उक्त उद्गार सुभाष गंज में धर्म सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका रत्नश्री आदर्श मति माताजी ने व्यक्त किए।

शान्ति धारा दिवस के रूप में मनेगा निवार्ण कल्याणक

मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि मुनि पुगंव श्री सुधासागर जी महाराज के आव्हान पर देशभर में त्रयपद के धारी भगवान श्री शान्ति नाथ स्वामी का निर्वाण कल्याणक शान्ति धारा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस दिन सभी मन्दिरों में विशेष कार्यक्रम के साथ जगत कल्याण की कामना के लिए ब्रहद मंत्रोच्चार के साथ महा शान्ति धारा होगी। और भगवान के निर्वाण कल्याणक पर लाड़ू समर्पित किए जायेंगे।

लोभ कषाय से बचने का उपाय करना है

उन्होंने कहा कि हम शरीर को स्नान कराते रहते हैं,जबकी मन को लोभ कषाय ने मलिन बना दिया है। लोभ कषाय के वशीभूत होकर धन के उपार्जन में यह जीव लगे रहते हैं।

हम लोभ लालच को बुरा मानते ही नहीं है। व्यक्ति हर समय धन प्राप्त करने के उपक्रम में लगा रहता है। उसकी कितनी आवश्यकता है। कितने संग्रह से वह। बहुत अच्छी तरह से रह सकता है, इस ओर उसका ध्यान जाता कहा है। बस वह तो ऐन केन प्रकेरण धन सम्पत्ति को एकत्रित करने में ही अपना बहुमूल्य सयम निकाल देता है। फिर भी धन की इच्छा नष्ट नहीं होती। जो धन पर लक्ष्य रखता है वह संसार में भ्रमण करता रहता हैं।
संकलन

अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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