उस स्थान की होने जा रही पो बारह वह है बीना बारह
रहली
जहां महामना महासन्त आचार्य श्री विद्यासाग़र गुरुदेव चरण रज पढ़ जाती है, वहाँ का कण कण पावन हो जाता है। हमने स्वयम ने देखा चिलचिलाती धूप है उष्ण प्रचड़ गर्मी का वेग लेकिन गुरुदेव तो अनियत विहारी है। दोपहर में ही अपने कदम पद विहार के लिए बढ़ा दिए। होता है क्या गुरु चरण पढ़ते गए देवता भी नतमस्तक होकर उनके साथ चल रहे हो जी हाँ इंद्र देव घुमड़ घुमड़ कर बरसे और ऐसा लगा मानो देवता भी उनके साथ हो यह सब प्रमाण देता है कि गुरु के चरण जहां उस स्थान के कण कण की पो बारह हो जाती है। और अब जिस स्थान की पो बारह होने जा रही है।
वह है बीना बारह जो रहली से लगभग 40 km की दूरी पर है। यह वह पावन भूमि है, जहा गुरुदेव की प्रेरणा आशीष से जीवदया परोपकार की दिशा में शान्तिधारा दुग्ध योजना की शुरुआत हुई। वही स्वालबन स्वदेशीकरण की दिशा में पायदान रखते हुए हथकरघा केंद्र की स्थापना हुई है। धन्य है महामना।जिनका अदम्य साहस, अदम्य साधना, निर्मोहिता 75 वर्ष की उम्र में कोई साधारण बात नही है। सरलता की प्रतिमूर्ति पूज्य गुरुदेव एक असाधारण व्यक्तित्व और महामना है।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
