वर्तमान में विज्ञान जो खोज कर रहा है उसका आधार वीतराग विज्ञान है शुद्धसागर महाराज

JAIN SANT NEWS रावत भाटा

वर्तमान में विज्ञान जो खोज कर रहा है उसका आधार वीतराग विज्ञान है शुद्धसागर महाराज

रावत भाटा

पूज्य मुनि श्री शुद्धसागर महाराज ने नया बाजार जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा विज्ञान जो खोज करता है वह पुदगल पर करता है, और वीतराग विज्ञान जीव की खोज करता है।जीव में अनंत शक्ति है हमें उसकी ऊर्जा को प्रकट करने की आवश्यकता है। धर्म में शक्ति है या हमारे में शक्ति है। हमें ऊर्जावान होना चाहिए

उन्होनें आगे कहा जीव मेंअनंत शक्ति होती है जीव एक समय में 14 राजू तक गमन कर सकता है।सम्यक दर्शन क्या है ?मुनि श्री ने सम्यक दर्शन को समझाते हुए कहा,अभी तक तो जीव कर्म को ज्यादा बांध रहा था, परंतु जब जीव को सम्यक दर्शन का ज्ञान हो जाता है तो जीव कर्म को कम बांध रहा है और काट ज्यादा रहा है L सम्यकदर्शी ज्ञानवान और मिथ्यादर्शी मूढ़ होता है।

उन्होनें आगे इस विषय पर जोर दिया की वर्तमान में विज्ञान जो खोज कर रहा है उसका आधार वीतराग विज्ञान है। क्योंकि वीतराग विज्ञान ही खोज का प्रमुख स्रोत हैजैन आगम का उल्लेख करते हुए मुनि श्री ने कहाजैन आगम के अनुसार ही सारी खोज हो रही है,वर्तमान में शून्य की खोज आर्यभट्ट द्वारा बताई जाती है। परंतु वास्तव में तो आर्यभट्ट के 300 वर्ष पूर्व ही जैन आगम अनुसार शून्य का आविष्कार हो चुका थाL। इसका प्रमाण देते हुए मुनि श्री ने कहा 2500वर्ष पूर्व आचार्य कुंदकुंद देव ने बताया कि जीव में इतनी शक्ति है कि उसके ज्ञान में लोकलोक प्रकाशित होता है। जीव के इंजीनियर मुनिराज होते है,औऱ पुदगल के इंजीनियर मानव होते है। विशेष व्याख्या करते हुए कहा जीव के तीन पंख है, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र, जब तीनों एक साथ अभेदता को प्राप्त होते हैं, तो हमारे चिंतन की धारा जितनी अधिक होगी और एक रूप होगी बाहर के सारे विकल्प समाप्त हो जाएंगे।

हे प्राणी तुम्हारे पास अनंत शक्ति है इसका सदुपयोग का चिंतन कर उसे इकट्ठा कर, जो बाहर बह रही है। उसको अब अंदर की और बहाओ।

क्षुल्लक अकम्प सागर महाराज के हुए केशलोच

वही प्रातःकी बेला में पूज्य क्षुल्लक105 अकम्प सागर महाराज ने अपने केशो का लुंचन किया इसमें समाज जन के साथ श्री जम्बू जैन ने भी अपनी सहभागिता दी। ऐसी भीषण गर्मी में पूज्य महाराज श्री का उपवास रहा। स्वयम हाथों से केशो का लुंचन एक साधना औऱ एक तप है।

पूज्य मुनि संघ ने जलविद्युत संयत्र का अवलोकन किया

शुक्रवार की बेला में पूज्य मुनि संघ राणा प्रताप साग़र बांध का व जलविद्युत संयत्र का अवलोकन किया। उन्होनें जाना टरबाइन के द्वारा जल से विद्युत ऊर्जा केसे बन रही है।

वहाँ मौजूद सभी अधिकारियो व स्टाफ ने पूज्य मुनि संघ का आशीष लिया व उनकी अभूतपूर्व आगवानी की।

अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *