छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवे दिन ज्ञान कल्याणक महोत्सव मनाया राजा श्रेयांस ने दिया आहार दान

JAIN SANT NEWS पिड़ावा

छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवे दिन ज्ञान कल्याणक महोत्सव मनाया राजा श्रेयांस ने दिया आहार दान

पिड़ावाः-

सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान में व भूतबलि सागर महाराज ससंध के सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति यज्ञ के पांचवे दिन गुरुवार को ज्ञान कल्याणक महोत्सव भक्ति भाव के साथ मनाया गया ।समाज प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि गुरुवार को प्रातः काल जाप, अनुष्ठान ,अभिषेक, शांतिधारा ,नित्य नियम पूजन व तप कल्याण की पूजन बाल ब्रह्मचारी मंजुला दीदी द्वारा करवाई गई जिसमें प्रतिष्ठाचार्य पंडित प्रवर राजेश राज भोपाल, हरीश चंद्र शास्त्री ,पं.अंकित शास्त्री सागर, संजय भैया पठारी सुशील भैया आदि उपस्थित रहे।सुबह ज्ञान कल्याणक महोत्सव के तहत महामुनी आदि कुमार सागर मुनिराज की आहार चर्या राजा श्रैयास कोमलचन्द प्रिसिंपल के परिवार ने नवदा भक्ति पूर्वक प्रथम आहार देने का सौभाग्य प्राप्त किया उसके बाद सोधर्म इन्द्र,व सभी इन्द्रो वश्रावक,श्राविकाओ ने मुनि आदि सागर को आहार दान दिया वहीं मंदिर जी के शिखर के लिए कलश स्थापना के लिए सभी श्रावक श्राविका ने अपनी ओर से दान राशि लिखवा कर पुण्य अर्जित किया। दोपहर बाद मंगलाष्टक ,दिग बंधन, रक्षा मंत्र, शांति मंत्र, ज्ञान कल्याणक की आंतरिक क्रियाये की इसके अलावा श्री जी की स्थापना, मंत्रा आराधना ,अधिवासना, तिलक दान, मुखोद्वाटन, प्राण प्रतिष्ठा, सूरिमंत्र, सूर्य कला, चंद्रकला, केवल ज्ञानोत्पति ,समवशरण रचना ,मुनि द्वारा दिव्य देशना, ज्ञान कल्याणक पूजन,व जिन बिम्ब की स्थापना की गई

समवशरण की रचना

जब भगवान को तपस्या के पश्चात केवल ज्ञान प्रगट होता है तब समवशरण की रचना होती है सोधर्म इन्द्र की आज्ञा से धनकुबेर समवशरण की रचना करता है वह धरती से 20,000 हाथ की ऊंचाई पर आकाश में अधर समवशरण की रचना बनती है समवशरण में 20,000 हजार सीढियां होती है जिन्हें प्रत्येक प्राणी अंतर मुहूर्त में चढ़कर समवशरण में पहुंचते हैं और भगवान की दिव्य ध्वनि का पान करते हैं। समवशरण गोलाकार बनता है। रात्रि में महा आरती महा आरती के बाद विद्वानों के प्रवचन हुवे उसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत इतिहास के दो सूर्य “भरत -बाहुबली” पर आधारित नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई ।

कम समय मे ज्यादा काम करना समझदारी है-मुनि सागर-प्रातः काल मूनिसागर महाराज व भूतबलि सागर महाराज ने ज्ञान कल्याणक के बारे में बताया मुनि सागर महाराज ने कहा कि आपने भगवान के चार कल्याणक मना लिए शुक्रवार को मोक्ष कल्याणक भी हो जाएगा आज ज्ञान कल्याणक है भावना प्रभावना को लेकर 5 दिन में समेट लेते हैं यह संसारी लोग हैं 5 दिन में ही हम 84 लाख पूर्व की कृतियां देखना चाहते हैं कम समय में ज्यादा काम करना समझदारी का काम होता है गर्भ कल्याणक 2 दिन मनाया वह सिर्फ 9 महीने का ही था ,,जबकि जन्म कल्याणक मनाया वह वो 83 लाख पूर्व का था और तप कल्याणक मनाया 1000 वर्ष पूर्व का था ज्ञान कल्याणक 1 लाख पूर्व का था और निर्वाण कल्याणक पंच लघु होता है वह कम समय में होता है उन्होंने बताया कि हमे इन कल्याणो के माध्यम से शिक्षा लेकर अपने जीवन का कल्याण करना चाहिए।

उसके बाद भूतबलि सागर महाराज ने बताया कि आप भी एक दिन सम्यक दर्शन,सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र के माध्यम से पुण्य करते हुए आप भी भगवान बन सकते हैं उन्होंने अंत में सभी को मंगलमय आशीर्वाद प्रदान किया। व वात्सलय भोज के पूण्यार्जक प्रातः बेला में दिनेश कुमार, रेखा जैन, आदिश कुमार, शेली जैन ,वैभव जैन रटलाई वाले रहे।

यह कार्यक्रम होंगे शुक्रवार कोपंच कल्याणक महोत्सव का समापन शुक्रवार को होगा इसमें मोक्ष कल्याणक होगा मोक्ष कल्याण के तहत जाप ,अनुष्ठान, अभिषेक ,शांतिधारा,नित्य नियम पूजन, निर्माण महोत्सव, मोक्ष कल्याण की पूजन, मंगल प्रवचन, विश्व शांति महायज्ञ, नगर परिक्रमा के पश्चात नवीन वदी पर श्री जी को विराजमान रात्रि में आरती प्रवचन नवीन जिनालय में होंगे।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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