प्रथम पुण्यतिथि पर विशेष
27 अप्रेल 2022
महामना निर्मल कुमार सेठी “बाबू” जी का रोम रोम जैन धर्म दर्शन एवम समाज को समर्पित था
दिल्ली
नाम निर्मल चारित्र निर्मल ओर निर्मलता के धारी थे प्रथम पुण्य तिथि पर हम देते भाव भीनी श्रद्धांजलि है।

एक बार मेरे विचारों से प्रभावित होकर बाबूजी कोटा से मुझे अपने साथ दिल्ली सैनिक फार्म निजी आवास पर ले गए। तीन चार दिन उनके साथ रहने और घूमने का अवसर मिला। जो अपनत्व प्यार वात्सल्य प्रेम मुझे उन्होंने दिया कि मेरा मन उनके प्रति श्रद्धा से भर गया ओर मै उनके व्यक्तित्व व कृतित्व से इतना प्रभावित हुआ कि अपने जीवन के 30 वर्ष निस्वार्थ भाव से समाज धर्म संस्कृति विभिन्न धार्मिक आयोजनों अनुष्ठानो की कवरेज सेवा में लगा दिए। मैंने बड़ी बारीकी से नोट किया कि बाबू जी जीवन के हर पल हर घड़ी जैन धर्म दर्शन के प्रचार प्रसार के बारे में चिंतन किया करते थे। सुबह जब उनके साथ घूमने निकलता था तो सभी प्रमुख संतो के रत्नत्रय के बारे में त्यागियो एवम ब्रह्मचारीयो से मोबाइल लगाकर पूछते थे। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि किसी गाँव या नगर में कोई भी छोटे बड़े सन्त हो उनको नवधा भक्ति पूर्वक आहार करवाते थे। वो मुझे समाज सेवी स्वर्गीय त्रिलोक चंद जी जैन (ओम कोठारी) कोटा वाले के निजी आवास पर ले गए और कि “पार्श्वमणि” को आचार्य विद्या नंद जी के दर्शन करवाने आपको ले जाना है। वो मुझे ले गए ।

आचार्य श्री ने प्रसन्नचित मुद्रा में पिछीका मेरे सर पर रख कर बहुत मंगल आशिर्वाद प्रदान किया।
आदरणीय बाबू जी ने अपने कुशल संचालन में 40 वर्षो तक महासभा को बहुत उचाईयो पर पहुँचा दिया। तीर्थो का जितना विकास उनकी मौजूदगी में हुआ। वो अविस्मरणीय है।अपने जीवनकाल में जैन तीर्थो की रक्षा सुरक्षा पुरातत्व को लेकर देश एवम विदेशों की कई यात्राएं की ।
सबसे बड़ी बात यह है कि कोटा की पावन वसुन्धरा पर पालीवाल कंपाउंड समाज सेवी स्वर्गीय श्री माणक चंद जी पालीवाल जी और भी समाज सेवी की गरिमा मय उपस्थित में उनको महासभा के अध्यक्ष पर पर चयनित किया गया था। एक बार उन्होंने मुझसे कहा कि मेरा एक बेटा पारस इस दुनिया से चला गया तो क्या हुआ दूसरा पारस “पार्श्वमणि” तो है। जब भी ये बात याद आती है तो आँखे भर आती है। कोटा स्थित जैन जन उपयोगी भवन में भी उन्होंने जब मेरा शाल माला से अभिनंदन किया तो कहा कि तुम जैन समाज की मणि हो ऐसे ही समाज धर्म की सेवा करते रहना । यही भावना है कि ऐसे महामना के व्यक्तित्व और कृतित्व पर एक मूवी जरूर बननी चाहिए।
जिससे आने वाली युवा पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में जानकारी मिल सके। उनके द्वारा गुल्लक योजना से तीर्थो की रक्षा के लिए बहुत राशि एकत्रित हुईं। बाबू जी के बारे में लिखना सूरज के सामने दीपक जलाने के बराबर होगा। समाज धर्म संस्कृति पुरातत्व के सजग प्रहरी को मै बाबू जी के आज 27 अप्रेल 2022 के दिन प्रथम पुण्यतिथि पर बारम्बार नमन करता हूँ।
आपका अपना पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार कोटा
