वात्सल्य वारिधि संघ सानिध्य में आचार्य श्री धर्म सागर जी का समाधि दिवस मनाया गया

JAIN SANT NEWS धामनोद

वात्सल्य वारिधि संघ सानिध्य में आचार्य श्री धर्म सागर जी का समाधि दिवस मनाया गया

धामनोद
श्री शान्तिवीरशिवधर्माजीत वर्द्धमान सुर्रिभ्यो नमः
साधुओ की संगति सत्संग है, संयम स साधना का लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति है, समता पूर्वक मरण समाधि है।कषायों को क्रश करना सल्लेखना है।आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ने यह उदगार कहे। उन्होंने कहा जन्म मृत्यु का नाम ही संसार है। जो जन्म लेता है वह मरता है। यह संसार की रीत है। किंतु शास्त्रों में उल्लेख है कि ज्ञानी इसके विपरीत चिंतन करते हैं। सर्वज्ञ प्रणित जिनवाणी कहती है आत्मा अजर अमर है।आत्मा सदैव रहती है।
आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ने धामनोद में यह उदगार आ आचार्य श्री ने दीक्षा गुरु आचार्य श्री ध धर्म सागर जी के समाधी दिवस पर कहे। उन्होंने आचार्य श्री के गृहस्थ अवस्था की अनेक प्रसंगों से अवगत कराया। उन्होंने कहा की आपने आचार्य श्री वीर सागर जी महाराज से मुनि अवस्था मे 2 प्रतिमा के नियम लिए। साथ ही जीवन व्यापन के लिए श्री चिरंजीलाल जी इंदौर कपड़ा मिल में नोकरी की थी। कपड़ा निर्माण में जीव हिंसा को देख कर नोकरी छोड़ दी। तथा स्वयम का व्यापार प्रारम्भ किया। बाद में इंदौर आचार्य कल्प श्री चंद्र सागर जी से 7 प्रतिमा के नियम
बड़नगर में लिए। आपने पहले क्षुल्लक दीक्षा श्री चंद्र सागर जी से ली।
उनकी अनायास समाधि के बाद श्री वीर सागर जी से ऐलक एवम मुनि दीक्षा ली। मुनि दीक्षा के बाद कई बार समाज ने आपको आचार्य पद देना चाहा, किंतु आपने कभी भी आचार्य पद स्वीकार नही किया।
2500 निर्वाण महोत्सव में जैन समाज के चारों सम्प्रदाय में 1974 में प्रमुख सानिध्य में आपकोपद दिया गया। किंतु कभी भी जैन परम्परा के सिद्धांतों से समझौता नही किया। आचार्य श्री धर्म सागर जी ने 12 वर्ष की सल्लेखना मात्र 4 माह मे पूर्ण कर क्रमशः त्याग किया। कषायों को क्रश करना सल्लेखना है। साधना का लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है। समता पूर्वक मरण ही समाधि है। आचार्य श्री पूर्वाचार्यो का स्नेह आशीर्वाद ही हमारा संबल है।
यह प्रभावशाली प्रवचन पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने धामनोद धर्म सभा में व्यक्त किये। प्रथमाचार्यचारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के तृतीय पट्टाधीश धर्म शिरोमणि आचार्य श्री धर्म सागर जी का 35 वा समाधि वर्ष पूर्ण श्रद्धा के साथ पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी चतुर्विध संघ सानिध्य में मनाया गया।
कार्यक्रम में प्रारम्भ में मंगलाचरण
रिया पाटिल ने नृत्य से किया।
आचार्य श्री शांति सागर जी के चित्र समक्ष दीप प्रवज्जलन श्री डॉ अनुपम जैन इंदौर ब्रह्चारिणी सविता दीदी शीतल धाम रतलाम तथा ब्रह्चारिणी नेहा दीदी श्री महावीर जी ने किया।
आचार्य श्री धर्मसागर जी की पूजन संघस्थ नेहा दीदी पूनम दीदी दीप्ति दीदी ने करवाई।
धामनोद समाज मीडिया प्रभारी श्री दीपक प्रधान ने बताया स्थापना श्री राजकुमार जी सेठी जयपुर ब्रह्मचारी गजु भैया श्री धर्म चंद जी गुरुजी सीकर तथा श्री परमीत जी भद्रावती कर्नाटक ने की जल द्रव्य से पूजन
श्री राजा भाई परिवार, चंदन से श्री बुधि चंद परिवार, अक्षत से
अक्षत श्री महेश पुष्प श्री वीरेंद्र लोकेंद्र नैवेद्य श्री अखिलेश प्रधान दीप निमरानी परिवार धूप श्री महेंद्र ज फल श्री नरेन्द्र जी अर्ध श्री विशेष नीलेश जी परिवार द्वारा तथा महाअर्ध धामनोद समाज के पदाधिकारियो सकल धामनोद समाज द्वारा चढ़ाया गया।
विनयांजलि सभा मे श्रीमति सपना जैन ने आचार्य श्री शांति सागर जी श्री धर्म सागर जी आचार्य श्री वर्द्धमान सागर महाराज गुणानुवाद किया।
श्री धर्म चंद जी गुरुजी सीकर ने भी अनेक संस्मरण से अवगत कराया बताया कि हमे भी गुरु चरणों मे रहने का सौभाग्य मिला है।मेरा यज्ञोपवीत संस्कार आचार्य भगवान ने किया है।
आचार्य श्री धर्म सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री शुभ मति माताजी ने सन 1974 श्री महावीर स्वामी 2500 वे निर्वाण महोत्सव के प्रसंग बताए।
संघस्थ मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी नेअपने उदबोधन में बताया कि सर्वज्ञ प्रणीत धर्म ही वास्तविक धर्म है आज संत वाद पंथ वाद में यह धर्म जन वाणी धर्म हो गया है। उन्होनें कहा
सर्वज्ञ प्रणीत धर्म की शरण मे जाने से व्यक्ति भटकता नही है।
आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य आदरणीय श्री राजकुमार जी सेठी जयपुर को प्राप्त हुआ तथा शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य
श्री राजेन्द्र भाई परिवार धामनोद को प्राप्त हुआ
राज पैलेस के श्रीमनीष जी श्री सुभाष जी मंगल का स्वागत दिगम्बर जैन समाज धामनोद ने कर आभार कृतज्ञता व्यक्त की आचार्य श्री ने भी आशीर्वाद दिया। वही क्षेत्रीय विधायक श्री पांची लाल मैढा ने भी आचार्य श्री संघ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम का सुंदर प्रभावी संचालन सुमधुर भजनों से ब्रह्चारिणी नेहा दीदी तथा श्री अजय पंचोलिया इंदौर ने किया।
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार

संकलन अभिषेक लुहाड़िया रामगंजमंडी

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