मुस्लिम युवक ने जैन संत की समाधि के लिए दान की बेशकीमती भूमि, समाज की मुंह-मांगी कीमत को भी ठुकराया

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नीमच (सिंगोली)। कस्बे में जैन संत की समाधि के लिए मुस्लिम युवक ने भूमि दान की। उनकी इस नेकी के लिए देशभर में सराहना हो रही है। धन्यवाद देने के लिए जहां देशभर से फोन आ रहे हैं वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने भी फोन और ट्वीट किया। मुनिश्री शांतिसागर का गुरुवार देर रात देवलोक गमन हो गया। शुक्रवार को अंत्येष्टि संस्कार किया जाना था।

दिशा शूल के मुताबिक कस्बे के दक्षिण-पश्चिम में समाधि के लिए नीमच-सिंगोली सड़क मार्ग पर सिंगोली नप के पूर्व चेयरमैन अशरफ मेव गुड्डू की जमीन को उचित माना। करीब ढाई बजे रात को ही समाजजन ने गुड्डू भाई को उठाकर मुंह मांगे दाम पर जमीन का कुछ हिस्सा मांगा। इस पर गुड्डू भाई ने कहा कि अगर अल्लाह का हुक्म है एक जैन संत की समाधि मेरी जमीन पर ही बने तो फिर धन-दौलत कोई मायने नहीं रखती है। वे उसी समय जैन समाज के लोगों के साथ एक किमी दूर जमीन पर पहुंचे और कहा, जो जगह पसंद है ले लें।

जैन समुदाय के लोगों ने मुख्य सड़क मार्ग से लगी भूमि को चुना। शुक्रवार को डोल निकाल कर जैन संत को पंचतत्व में विलीन किया गया। जैसे ही अशरफ मेव द्वारा किए गए इस नेक कार्य की जानकारी मिली, देश भर से लोगों ने मेव को फोन कर दो समुदायों के बीच सौहार्द की मिशाल कायम करने के लिए धन्यवाद देना शुरू कर दिया।

इस कदम की सराहना के लिए मप्र सहित राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र व दिल्ली से मेव के पास फोन आ चुके हैं। शनिवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने फोन लगाकर धन्यवाद देते हुए ट्वीट कर कहा, धन्यवाद गुड्डू भाई आप सर्वधर्म समभाव के प्रतीक हैं। अशरफ मेव गुड्डू ने पहले भी पिता बशीर अहमद मेव की याद में कांग्रेस कार्यालय गांधी भवन का निर्माण करवाया था।

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