● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Video 03 : : गोम्म्टेश स्तुति : : छंद 05 – 06
स्तुतिकार- आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धांत चक्रवर्ती
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
लया-समक्कंत-महासरीरं,
भव्वावली-लध्द-सुकप्परुक्खं।
देविंद-विंदच्चिय-पाय-पोम्मं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं।।5।।
दियंबरो जो ण च भीइ-जुत्तो,
ण चांबरे सत्तमणो विसुद्धो।
सप्पादि-जंतुप्फुसदो ण कंपो,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं।।6।।
भगवान गोम्म्टेश्वर बाहुबली की विश्व प्रसिद्ध स्तुति का पहली बार एक एक शब्द से अर्थ को समझने के लिए click कीजिए…
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