● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 29 : : तत्त्वसार गाथा 56 – 57
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
स-सहावं वेदंतो
णिच्चल-चित्तो विमुक्क-परभावो।
सो जीवो णायव्वो
दंसण-णाणं चरित्तं च।।56।।
जो अप्पा तं णाणं
जं णाणं तं च दंसणं चरणं।
सा सुद्ध-चेयणा वि य
णिच्छय-णयमस्सिए जीवे।।57।।
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तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg
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