● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 05 : : तत्त्वसार गाथा 08 – 09
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
जो खलु सुद्धो भावो
सो अप्पा तं च दंसणं णाणं।
चरणं पि तं च भणियं
सा सुद्धा चेयणा अहवा।।8।।
जं अवियप्पं तच्चं
तं सारं मोक्ख-कारणं तं च।
तं णाऊण विसुद्धं
झायहु होऊण णिग्गंथा।।9।।
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