● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 26 : : तत्त्वसार गाथा 50 – 51
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
जं होइ भुंजियव्वं
कम्मं उदयस्स आणियं तवसा।
सयमागयं च तं जइ
सो लाहो णत्थि संदेहो।।50।।
भुंजंतो कम्म-फलं
कुणइ ण रायं तह य दोसं च।
सो संचियं विणासइ
अहिणव-कम्मं ण बंधेइ।।51।।
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तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg
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