जिनके मन में विकार भाव नहीं आता, उनका ब्रम्हचर्य व्रत होता पूरा

Bandha ji JAIN SANT NEWS

अतिशय क्षेत्र बंधाजी में पिछले 10 दिन से 170 मंडलीय समवशरण महामंडल विधान एवं संस्कार शिविर का आयोजन किया जा रहा है। रविवार को दशलक्षण पर्व का समापन हुआ। अनंत चतुर्दशी के दिन वेदी प्रांगण स्थित मंदिर में अजितनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक किया गया। रविवार को बंधाजी में वासु पूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक भी मनाया गया। मुनिश्री विमल सागर महाराज ने दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन अपने प्रवचनों के माध्यम से संक्षेप में 10 धर्मों के बारे में बताया। मुनिश्री विमल सागर महाराज ने कहा कि आज अंतिम धर्म उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का दिन है। ब्रह्मचारी धर्म के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जो अपने जीवन में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हैं अगर उनकी दृष्टि स्त्री के ऊपर भी पड़ जाती है तो हमेशा उसको मां , बहन , बेटी की दृष्टि से देखते हैं , तब जाकर के ब्रह्मचर्य व्रत का पालन होता है। जिनके मन में किसी भी प्रकार का विकार भाव नहीं आता उनका ब्रह्मचर्य व्रत होता है। मुनिश्री ने एक दृष्टांत के माध्यम से बताया कि पहले गुरुकुल पद्धति चलती थी , उसे ब्रह्मचर्य आश्रम कहते थे। जब तक गुरु के पास रहते थे ब्रह्मचारी व्रत धारण करके अध्ययन किया जाता था। एक बालक ने गुरुकुल में गुरुजी के पास अध्ययन किया , उसकी शिक्षा पूरी हुई। जब वह बालक शिक्षा पूरी होने के बाद घर जाने लगा तो गुरु दक्षिणा में महाराज ने कहा एक नियम लेकर जाओ शुक्ल पक्ष में ब्रह्मचारी व्रत को धारण करना। उस बालक ने खुशी – खुशी व्रत को धारण कर लिया महीने में 2 पक्ष होते हैं एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष शुक्ल पक्ष में ब्रह्मचारी धारण करने का नियम ले लिया। दूसरी ओर एक बालिका जिसने आर्यिका से शिक्षा ग्रहण की थी , वह अध्ययन करके जब घर जा रही थी तो गुरु दक्षिणा के रूप में आर्यिका ने उसे कृष्ण पक्ष में ब्रह्मचर्य व्रत धारण करने का नियम दिया। कालांतर में संयोगवश दोनों का विवाह हो गया , जब समागम का समय आया तो उस लड़के ने कहा मेरा शुक्ल पक्ष में ब्रह्मचारी व्रत का नियम है। शुक्ल पक्ष बीत गया 15 दिन बाद कृष्ण पक्ष आता है पत्नी बोली मेरा कृष्णपक्ष में ब्रह्मचारी व्रत का नियम है। दोनों ने इसको देवीय संयोग माना और घर में रहकर पति – पत्नी होते हए भी ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते रहे। प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि रविवार को 170 मंडलीय विधान में शामिल होने एवं पंच ऋषिराजों के दर्शन करने के लिए स्व . बृजेंद्र सिंह राठौर के पुत्र कांग्रेस के युवा नेता नितेंद्र सिंह राठौर , रिंकू भदौरा , अंकित जैन , गौरव जैन , नीरज जैन सहित अनेक कांग्रेस के नेता बंधाजी पहुंचे। बंधाजी अध्यक्ष मुरली मनोहर जैन , महेंद्र जैन , राहुल जैन बंधा एवं कमेटी के सभी लोगों ने सभी नेताओं का तिलक एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया।

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