आगरा । हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में रविवार को अहं योग मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर महाराज और मुनि श्री 108 चंद्रसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में दसलक्षण महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजन जिन अभिषेक एवं शांतिधारा की गई । भगवान शांतिनाथ का प्रथम अभिषेक राकेश बजाज एवं निर्मल मौठया ने किया । कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिराज के पाद प्रक्षालन सचिन जैन गोटेगांव वाले परिवार द्वारा किया गया । दीपक जैन एवं शशि पाटनी द्वारा मंगलाचरण किया गया । इसके बाद मुनि श्री ने मंगल प्रवचन देते हुए उत्तम आर्जव धर्म के बारे में बताया । उन्होंने कहा कि मन , वचन , काय की चेष्टा एक होना , मन में सरलता होना ही उत्तम आर्जव धर्म है । जब हम मन से कुछ सोचते हैं और काय से कुछ और ही चेष्टा करते हैं तो ये माया है । यह छल कपट है । इसे करने में बहुत एनर्जी लगती है । माया को समझना बहुत ही कठिन है । जब तक हमारे सामने शत्रुता का भाव होगा तब तक हम सरल नहीं हो सकते । मन को सरल बनाना चाहिए . जितना व्यक्ति सरल होगा वह भीतर बाहर से एक होगा । सिम्पल रोल में आए हैं डबल – ट्रिपल रोल न करें । गुरु जी ने बांसुरी और ढोलक का उदाहरण दिया है । मुनि श्री 108 चंद्र सागर महाराज ने भक्तामर स्त्रोत पढ़ाया । शाम सात बजे मुनिराज एवं जिनेंद्र भगवान की मंगल आरती संगीतमय की गई । रात 8 बजे से कमला नगर युवा मंडल द्वारा नाटक का मंचन किया गया । मंच का संचालन मनोज जैन द्वारा किया गया । मीडिया प्रभारी शुभम जैन ने बताया कि कल ( सोमवार ) दस लक्षण महापर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की पूजा होगी । इस कार्यक्रम में आगरा दिगंबर जैन परिषद के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन , सुनील जैन ठेकेदार , अनंत जैन , हीरालाल बैनाड़ा , आशोक जैन , विमल जैन चौधरी , गौरव जैन , सुमेर पांडया , राजेश सेठी , रामेश जैन , सतीश जैन , महीपाल जैन आदि जैन समाज के लोग मौजूद रहे ।
