मान मनुष्य को झुकने नहीं देता :मुनि श्री

पत्थर अहम का गलता नहीं क्या करें , सब दिए जलते हैं , मगर मन का नहीं दीया जलता , खोजते – खोजते हो जाती है जीवन की शाम । सबका पता मिलता है अपना पता नहीं । उक्त उद्गार मुनिश्री विमल सागर महाराज ने व्यक्त किए । गौरतलब है कि बुंदेलखंड के हजारों वर्ष प्राचीन एवं प्रसिद्ध जैन तीर्थ बंधाजी में पयूषण पर्व के अवसर पर 170 मंडलीय समवशरण महामंडल विधान विश्व शांति महायज्ञ एवं आध्यात्मिक संस्कार शिविर का आयोजन किया जा रहा है । यह आयोजन 19 सितंबर तक चलेगा । जैन तीर्थ बंधाजी में मुनिश्री विमल सागर संसघ पंच मुनिराजों के सान्निध्य में शनिवार को 10 धमों में दूसरा धर्म उत्तम मार्दव धर्म मनाया गया । सुबह 7.00 बजे शिविर में शामिल शिवरार्थियों एवं श्रद्धालुओं द्वारा श्रीजी का अभिषेक एवं शांति धारा की गई । मुनिश्री ने उत्तम मार्दव धर्म के अवसर पर कहा कि आज इ उत्तम मार्दव धर्म है । उत्तम धर्म के अवसर पर बोलते हुए , उन्होंने कहा कि उत्तम का अर्थ होता है ख्याति , पूजा , लाभ आदि से रहित जिन्होंने अपने मन को मार दिया है , जिन्होंने अपने मान का मर्दन कर दिया है । वहीं उत्तम मार्दव धर्म का अधिकारी होता है । मुनिश्री ने कहा कि मान मनुष्य को झुकने नहीं देता अनादि काल से इस मान की संगति से हमारा पतन होता आ रहा है । उन्होंने कहा जिसके वचनों में कोमलता होती है जो कठोर वचन नहीं बोलता किसी को पीड़ा देने वाले वचन नहीं बोलता वही मार्दव धर्म का अधिकारी होता है । अपने कुल , जाति , धर्म , बुद्धि , तप , शास्त्र ज्ञान , चरित्र , धन और शक्ति से युक्त होकर भी इन सब के विषय में समता भाव रखते हुए किंचित मात्र घमंड या मान नहीं करना ही उत्तम मार्दव धर्म है । रविवार को आज उत्तम आर्जव धर्म मनाया जाएगा ।
