विद्याधर से विद्यासागर

*☀विद्यागुरू समाचार☀* विद्याधर से विद्यासागर

#शेयर🤗

#विद्याधर_से_विद्यासागर (किताब)😍

#भले_और_भोले_परिवार_की_वापसी🤗

:समय का कार्य बीतना है, वह यहाँ अजमेर में भी बीत रहा था। दिन से सप्ताह की ओर सप्ताह से माह की ओर मल्लप्पाजी का परिवार बार-बार श्री ज्ञानसागरजी के दर्शन करता, प्रवचन सुनता एवं मुनिसंघ के लिए चौका लगाता अनन्तनाथ एवं शांतिनाथ तब किशोर थे। अजमेर के आकाश के नीचे उन्हें ज्ञानसागर के दर्शन और प्रवचन चाहे जब मिल जाते थे, पर छोटी वय के कारण वे अपने भीतर के उस पृष्ठ को नहीं बांच पा रहे थे, जिस पर उनके वैराग्य की कहानी लिखी गई थी जगनियन्ता के हाथों अस्तु माह भर रहने का अवसर मिला पर स्थिति दोनों की वही रही “बालपने में ज्ञान न लह्यो।’ ज्ञानसागरजी ने मारुति को विधिवत् ब्रह्मचर्य व्रत की दीक्षा प्रदान कर दी एक दिन मारुति त्याग के सागर की एक बूँद बनकर गद्गद् हो गये हो गए कृतार्थ कुछ दिनों के बाद मल्लप्पाजी परिवार सहित लौट गए सदलगा, साथ थे ब्रह्मचारी मारुति जी भी।पोस्ट-106…शेषआगे…!!!

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