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मल्लप्पाजी सपरिवार सोनी जी की नसिया में जिन भगवान् के दर्शनार्थ वंदनार्थ उपस्थित थे। वे नसिया का स्वर्ण शृंगार देख समझ रहे थे देश के सुप्रसिद्ध श्रीमंत सेठ भागचंद सोनी द्वारा निर्मित नसिया उन्हें अच्छी लग रही थी।
दक्षिण के कुछ जैनाजैन मंदिरों और मूर्तियों में ही स्वर्ण धातु का अधिक योगदान देखा था उनने, अब जो यह उत्तर की नसिया देखी तो उन्हें लगा… सारा देश स्वर्ण-शृंगार के लिए एक जैसी विचार वीथि पर है। देश-विदेश से अजमेर आने वाले यात्रीगण यह स्वर्ण मंदिर/सोने की नसिया, हाँ सोनी की नसिया अवश्य देखते हैं। उसे देखे बगैर अपनी यात्रा अपूर्ण मानते हैं।
अनन्तनाथ और शांतिनाथ अपनी बाल सुलभ जिज्ञासा से नजर नचा रहे हैं। उन्हें भी नसियां बेजोड़ लग रही है। मंदिर जी के अन्य भाग में द्वारिका जी की रचना देखते हैं, यह भी स्वर्ण आभा से दीप्त है।
स्वर्ग की श्री यहाँ सिंचित कर दी है जैसे तीन मंजिली रचना, लाल पत्थरों का शिल्प, ऊपर विशाल गगनचुम्बी-शिखर, शिखर पर सुडौल कलश, कलश भी सामान्य नहीं स्वर्ण निर्मित मंदिर के साफ शुद्ध कलापूर्ण प्रांगण में चौरासी फुट उत्तुंग मान-स्तंभ इतना विशाल (शायद) अन्यत्र नहीं है। स्तंभ के ऊपर चार पद्मासन प्रतिमाएं स्थापित हैं तो नीचे चार खड़गासन प्रतिमाएँ सुशोभित हैं।
गरिमा मिश्रित वहाँ के सौन्दर्य को शब्दों से नहीं बांधा जा सकता, उसके लिए चाहिए एक श्रद्धापूर्ण दृष्टि, हाँ दो आँखें इसका पूरा नाम है बड़ा धड़ा नसियां इस महान् नगरी अजमेर का महान् मंदिर मूल वेदी पर मूलनायक है आदिनाथ भगवान् ।
इस मंदिर के अतिरिक्त अन्य मंदिरों की मूर्तियों के दर्शन भी किए मल्लप्पा परिवार ने यहाँ भी हीरे, जवाहर और स्फटिक की चमचमाती मूर्तियों ने नयन ज्योति को आकर्षित किया। समवसरण मंदिर की छटा पृथक् ।
पोस्ट-103…शेषआगे…!!!
