विद्याधर से विद्यासागर

*☀विद्यागुरू समाचार☀* विद्याधर से विद्यासागर

शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍

मारुति विद्यासागर को देखते हुए अपने ही अतीत की एक खंदक में खो गये थे, जहाँ तम्बाखू का खेत लहलहा रहा था खेत में मारुति खड़ा था और मेढ़ पर विद्याधर कच्ची उम्र का वह दृश्य जहाँ मारुति ने विद्या को पौधों से बातें करते देखा था। वह एक ही प्रश्न के उत्तर को खोज रहा था डूबा डूबा तम्बाखू का कीड़ा आत्मा की पीड़ा कैसे जान सका, यह बात मेरी समझ में क्यों नहीं आती थी?

मुनिवर ज्ञानसागर के प्रश्न ने मारुति को विचार सरोवर की हिलोरों से उठाकर उत्तरों के घाट पर रख दिया, सो अचकचा कर बोला मारुति मैं… मैं…अज्ञानी हूँ महाराज, हाथ जोड़ लिए मारुति ने, मैं कुछ ज्यादा जानता नहीं महाराज, फिर भी एक प्रार्थना है मुझे… मुझे भी आप दीक्षा प्रदान कर दीजिए, मैं यहीं, आपके चरणों में रहने तैयार हूँ, मैं सब कुछ वैसा वैसा करूंगा जैसा विद्या भैया करेंगे।

छि-छि… तुम अब भी विद्या भैया कह रहे हो, अरे अब वे भैया नहीं, मुनि विद्यासागर हैं।

-जी महाराज भूल हो गई। मैं विद्यासागर ही कहूँगा, मुझे यहीं पर शरण दे दीजिए।

हँसने लगे महाराज पारिवारिक सदस्यों के नेत्र भर आये मारुति की बातों से तब तक ज्ञानसागरजी बोल पड़े अच्छा ऐसा करो, ब्रह्मचर्यव्रत लेकर घर में रहो करबद्ध मारुति का सिर झुक गया पुनः ज्ञानसागर के चरणों पर, बोला, महाराज ठीक है, ब्रह्मचर्य व्रत प्रदान कीजिए। “ठीक है। बतलाएंगे।” मिल गया संकेत मारुति को मिल गया संकेत सम्पूर्ण परिवार को पूज्य ज्ञानसागरजी ने आज्ञा दी विद्यासागरजी को श्री मल्लप्पाजी के परिवार से बात करने की विद्यासागरजी ने नेत्र उठाए, दृष्टि टिका दी-श्रीमंती जी के मुख मण्डल पर सदा माँ कहने वाले व्यक्ति ने इस बार केवल देखा भर था, माँ का रोम-रोम पुलकित हो उठा था।

उन्हें क्षणभर को लगा कि विद्या बेटे को गले लगा लें। पर माँ साधारण महिला नहीं थीं, वे थीं एक महामुनि की माँ, अतः बोली कुछ न, बस देखती रहीं हठीले लाल को।

आँखों की सच्चाई ज्ञापित हो कि पहले ही झुक गई मुनि विद्यासागर के चरणों में बोली सिर्फ नमोऽस्तु सब पर कृपादृष्टि करने वाला हाथ उठा विद्यासागरजी का मुनि का आशीष मिला श्राविका को धर्म की उस स्थिति की बलिहारी है, जहाँ बेटा का हाथ इतना महान् हो जाता है कि वह माँ को भी आशीष देने की पात्रता धारण कर लेता है।

पोस्ट-101…शेषआगे…!!!

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *