● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 25 : : तत्त्वसार गाथा 48 – 49
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
मुक्खो विणास-रूवो
चेयण-परिवज्जिओ सया देहो।
तस्स ममत्ति कुणंतो
बहिरप्पा होइ सो जीवो।।48।।
रोयं सडणं पडणं
देहस्स य पिक्खिऊण जर-मरणं।
जो अप्पाणं झायदि
सो मुच्चइ पंच-देहेहिं।।49।।
Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️
तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल :
★Share in all ur Jain groups★
