● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

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Day 16 : : तत्त्वसार गाथा 30 – 31
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर

जह जह मण-संचारा
इंदिय-विसया वि उवसमं जंति।
तह तह पयडइ अप्पा
अप्पाणं जह णहे सूरो।।30।।

मण-वयण-काय-जोया
जइणो जइ जंति णिव्वियारत्तं।
तो पयडइ अप्पाणं
अप्पा परमप्पय-सरूवं।।31।।

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तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg

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