शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍
मीतकीखबरकबआयेगी :
कोई तीर्थ यात्री संघ कभी सदलगा से निकलता तो वहाँ के लोग उनसे अजमेर के विषय में अवश्य पूछते थे, क्या आप अजमेर गये हैं? तीर्थयात्री न कर देते तो भी सदलगा निवासी चुप न रहते, प्रश्न कर बैठते क्या आप भविष्य में कभी वहाँ जायेंगे? इस बार भी ‘न’ हो जाता तब कहीं चुप हो पाते।
जो यात्री उत्तर भारत के तीर्थों को जाते, उनके आगे प्रस्ताव रख देते- जब आप श्री महावीरजी जायेंगे तो वहीं से अजमेर भी अवश्य जाइये, वहाँ परम पूज्य ज्ञानसागर महाराज के समीप आपको सदलगा का एक योगी अवश्य मिलेगा, उनसे मिलिये और हाल-चाल पूछिये। फिर वे अपना लिखित पता यात्रियों को देते और अनुरोध करते युवा योगी बाल ब्रह्मचारी विद्याधर का हाल-चाल पत्र से सूचित कर देना। यहाँ उनके माता-पिता, भाई बहन निवास करते हैं, आपके पत्र से उन्हें बोध लग जायेगा।
यात्रियों के प्रस्थान करने के तुरंत बाद सदलगा के वे लोग प्रतीक्षा करने लगते पत्र की। धीरे धीरे विभिन्न माध्यमों से जब-तब, विद्याधर के समाचार सदलगा पहुँचने लगे, लोगों को चैन मिलने लगा।
एक यात्री ने कई महीने बाद सदलगा के योगी के विषय में जानकारी भेजी सदलगा वासियों को कि विद्याधर को कभी भी मुनिपद की दीक्षा प्राप्त हो सकती है, वर्तमान में वे कठिन परीक्षणों और तपों से होकर गुजर रहे हैं। नित नए व्रत उपवास स्वीकार कर रहे हैं।
यों ज्ञानसागरजी से पता नहीं चलता, न विद्याधर बतलाते, फिर भी हम लोगों की आँखों ने जो देखा हैं वहाँ, उससे यही, आभास होता है। कठिन साधना और आराधना की घड़ियाँ हमने अपने नेत्रों से स्वतः देख ली हैं।
ऐसे पत्रों से संबंधी व सदलगावासी कौतूहल में पड़ जाते और विचार करने लगते- काश एक नजर हम भी देख पाते। मगर रह जाते चुप, दक्षिण से उत्तर की भौगोलिक दूरियाँ जो जानते हैं।
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