● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 04 : : तत्त्वसार गाथा 06 – 07
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
इंदिय-विसय-विरामे
मणस्स णिल्लूरणं हवे जइया।
तइया तं अवियप्पं
ससरूवे अप्पणो तं तु।।6।।
समणे णिच्चल-भूए
णट्ठे सव्वे वियप्प-संदोहे।
थक्को सुद्ध-सहावो
अवियप्पो णिच्चलो णिच्चो।।7।।
Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️ https://youtu.be/RE5jr-LV1xw
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