😍#महत्वपूर्णशंकासमाधान😍
🤗पाणिग्रहण में सात फेरे और गजरथ फेरी में सा परिक्रमा दोनो में ‘सात अंक का क्या महत्व है?🤗
मुनिश्री #प्रमाणसागर जी महाराज कहते है कि– सात अंक- तत्व, परम स्थान और परम प्रेम का प्रतीक है। विवाह का अर्थ प्रधान रुप से वर वधू का सामाजिक बंधन में बंध कर एक दूसरे के प्रति समर्पित होने से है।
ऐसा समर्पण जो दोनों के लौकिक एवं अध्यात्मिक जीवन के विकास में सहायक सिद्ध हो सके। पाणिग्रहण के समय होने वाले सात फेरे इस परम प्रेम और समर्पण के प्रतीक हैं।
वहीं हम सभी जानते हैं कि तीर्थंकर भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाने हेतु सौधर्मइन्द्र भी अपने परिवार सहित सात कदम आगे आकर भगवान को प्रणाम करते हैं क्योंकि उनकी जिनेन्द्र भगवान के प्रति पूर्ण प्रेम और श्रद्धा होती है ।
जैसे कि बुंदेलखंड में पंचकल्याणक महोत्सव में जब भगवान की प्राण प्रतिष्ठा के बाद जो फेरी होती है वह भी सात बार होती है, जो कि प्राण प्रतिष्ठा से पूज्यनीय हुई भगवान की मूर्ति के प्रति हमारी श्रद्धा, भक्ति, प्रेम, समर्पण, आस्था, विश्वास और अनुराग का प्रतीक है। इसलिए ‘सात’ अंक की पाणिग्रहण और गजरथ फेरी दोनो में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।

