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👉वीर निर्वाण सम्वत -2547 -48 , विक्रम सम्वत – 2078
04 मई , 2021 मंगलवार , वैशाख कृष्ण पक्ष, अष्टमी

👉 > 🪙 वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा में अग्नि से सम्बंधित व्यवस्थाएं की जाती है, इसे अग्नि दिशा क्यों कहा है ?
अक्टूम्बर से लेकर मार्च तक तापमान में कमी और मार्च के बाद तापमान में वृद्धि क्यों होती है।
पृथ्वी का दक्षिणी ध्रुव सूर्य के अत्यधिक निकटतम रहता है।
पृथ्वी को ग्लोब के आधार पर देखा और समझा जा सकता है।
दक्षिणी ध्रुव पर दिसंबर से लेकर मार्च तक सूर्योदय नहीं होता है।
और मार्च के बाद सूर्य इस ध्रुव के अत्याधीन निकट आना प्रारम्भ कर देता है जिससे इस ध्रुव का तापमान अत्यधिक गर्म हो जाता है।

मई – जून में हम जितना दक्षिण की और बढ़ेंगे उतना ही अधिक तापमान हमें मिलेगा। वही अपेक्षाकृत उत्तर ध्रुव की और बढने पर तापमान नीचे की और गिरता हुआ मिलेगा।
अतः हमारे जीवन को बैलेंस करने के लिए व्यवस्थाय भी गर्म एवं ठन्डे तत्वों के आधार पर ही मिलान कर बनाई जाती है।
उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव से धनात्मक एवं ऋणात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है जो मानव जीवन को प्रभावित करता है।
हमारे शरीर मे सिर से धनात्मक और पैर से ऋणात्मक ऊर्जा प्रवाहीत होती है I
जब हम उत्तर दिशा मे सिर करके सोते है तो
धनात्मक + धनात्मक ऊर्जा का प्रवाह एक दूसरे का विरोध करता है
जिससे हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का ह्रास होने से थकान महसूस होती है
और हम धीरे धीरे बीमार होने लगते है I
अतः उत्तर दिशा की और सिर करके सोने से बिमारी बढ़ती है I
बीमार व्यक्ति को कदापि नहीं सुलाये

फैक्ट्री , भूमि , भवन आदि की एनर्जी टेस्ट करवाकर सही मार्गदर्शन प्रात करे।
👉नक्षत्र -उत्तराषाढा
👉चन्द्र – मकर
( आज जन्म लेने वाले बच्चो की मकरहोंगी

👉 अभिजित – 11:57 से 12:50
👉 राहुकाल -15:43 से 17:22
👉 दिशा शूल – उत्तर
👉 अग्निवास- पृथ्वी

सूर्योदय – 05:46
सूर्यास्त – 19:01

➡️दिन का चौघड़िया >

रोग – अमंगल
05:46 से 07:26
उद्वेग – अशुभ
07:26 से 09:05वार वेला
चर – सामान्य
09:05 से 10:44
लाभ – उन्नति
10:44 से 12:24
अमृत – सर्वोत्तम
12:24 से 14:03
काल – हानि
14:03 से 15:43काल वेला
शुभ – उत्तम
15:43 से 17:22Rahu Kalam
रोग – अमंगल
17:22 से 19:01

🌙रात्रि का चौघड़िया >

काल – हानि
19:01 से 20:22
लाभ – उन्नति
20:22 से 21:42काल रात्रि
उद्वेग – अशुभ
21:42 से 23:03
शुभ – उत्तम
23:03 से 24:23+
अमृत – सर्वोत्तम
24:23+ से 25:44+
चर – सामान्य
25:44+ से 27:04+
रोग – अमंगल
27:04+ से 28:25+
काल – हानि
28:25+ से 29:46+

वास्तु एवं ज्योतिष कंसलटेंट >> ( 20 वर्षो से निरंतर )
राकेश जैन हरकारा ,Mob- 9414365650
( परामर्श ऑफिस और फोन दोनों पर सशुल्क है )

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