देशनोदय चवलेश्वर
*निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव भक्तामर रिद्धि सिद्धि मंत्रों के निर्देशक108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा
जिंदगी की समस्या का समाधान मैं खुद कर लूंगा कोई दूसरा से हल नहीं कराऊंगा,अदृश्य शक्ति को जगाने का मार्ग बता रहे हैं
1.जिंदगी का बड़ा सूत्र-सबसे पहले कार्य स्वयं करने की कोशिश करूंगा किसी की मदद नहीं लेंगे मेरी जिंदगी की जो भी आवश्यकता है वह मैं स्वयं करूंगा मैं आंसू भी स्वयं पहुंच लूंगा मेरी जिंदगी की समस्या का समाधान मैं खुद कर लूंगा कोई दूसरा से हल नहीं कराऊंगा,अदृश्य शक्ति को जगाने का मार्ग बता रहे हैं जो फोकट में मिलता है वह आपने आपने बड़ी भूल कर दोगे अपनी इच्छाशक्ति जगाओ तो आपको स्वयं जगा लूंगा मुझे किसी के सहारे की जरूरत नहीं होगी मेरी आंखों में आंसू स्वयं पहुंच लूंगा मैं स्वयं सब कार्य खुद कर लूंगा।
2.स्वाभिमान-आप अपने मन से अकेले हो जाओ भीड़ में रहकर भी अकेले रहने का एहसास करो पर के आधीन मत हो दूसरा व्यक्ति कुछ दे देवें तो ठीक है यह गुलामियत है पराधीन पना है इसके बगैर मैं रह कर दिखाऊंगा मन को निरोध करो जिसको पूरी नहीं कर सको फिर आपकी पूरी दुनिया गुलाम होगी आपको चक्रवर्ती और सौधर्मेन्द्र जैसा पद मिलेगा,में कोई इच्छा नहीं करूंगा कि जो मैं स्वयं पूरी ना कर सकूं कोई मुझसे कुछ कहेगा तो मैं उसको नही छोडूंगा यह मेरा स्वाभिमान है यह स्वाभिमान नहीं अभिमान है।
3.कर्म का गुलाम नहीं-मैं कर्म का गुलाम नहीं हूं कर्म की कठपुतली बन के नाचू साता कर्म का उदय आ जाए तो हमें यह वस्तु मिल जाए,कर्म के आधीन है अपना स्वाभिमान जगाओ भोगने का भाव आता है शक्ति भी है लेकिन मांगूगा नहीं,इच्छाएं हैं पराधीन है मैं इच्छाओं को मारता हूं।
4.आज तक नहीं हुए-जब कभी हम एहसास हो वो मेरे पास नहीं है मेरे आधिनस्थ लोगों के पास नहीं है तपस्या करने पर भी वो प्राप्त नहीं हो सकता जहां कुछ कार्य करने का मन हो लेकिन नहीं कर पाते संसार में हर व्यक्ति इतना बड़ा सब सपने देखता है लेकिन वहां पहुंच नहीं पाते कुछ ज्ञेय तो ऐसे हैं कि संसार की सभी आंखें मिलकर ही उसके कोई नहीं देख सकता त्रस नाली के बाहर कुछ नहीं देख पाता है बहुत शब्द है लेकिन हम कितना सुन पाते हैं कुछ भाषा वर्गणांए ऐसी है जो मुंह से निकला ही नहीं आज तक
5.इच्छा को रोकना-हमें वह इच्छाएं नहीं करनी है जो पापियों,दुश्मनों से करानी पड़े ऐसा कार्य नहीं करना ऐसी इच्छाएं नहीं करूंगा
प्रवचन से शिक्षा-अपनी इच्छाएं इतनी बड़ी मत करो कि आपको पापियों के सामने झुकना पड़े।
सकंलन ब्र महावीर 7339918672 परम गुरु भक्त2मई2021
नमनकर्ता-पचराई जी शांतिनाथ भगवान एसके जैन साहब,राकेश जैन,डॉ.चक्रेश जैन,राजीव जैन प्रभारी अभय जैन,सुरेंद्र जैन, उत्तम चंद जैन
पुज्य सुधासागर जी के प्रवचनांश व अमृत सुधावाणी के लिए जुडे
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