देशनोदय चवलेश्वर
*निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्रमण संस्कृति रक्षक 108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा
जैन का जो बाप हैं वह जिनेन्द्र देव है बेटी का बाप नहीं जिनेन्द्र देव,जैन बेटे का बाप जिनेंद्र देव हैं
1.भोजन अशुद्ध-जैन समाज मंदिर की पूजन सामग्री में समान है लेकिन घर के भोजन में फेल हमने मंदिर की पूजन की थाली में कोई अशुद्धि करें तो लड़ मरते हैं झगड़ा कर लेते हैं लेकिन घर के पूजन में चौके में फेल है वहां तो अशुद्धि हो चुकी है अभिषेक का लोटा तो सबको समान है लेकिन घर का पानी भ्रष्ट हो रहा हैं।
2.परमात्मा को जानो-हम आत्मा को नहीं जानते लेकिन अपने परमात्मा को जाना आप अपना पता नहीं कोई बात नहीं लेकिन आप ही ने अपने भगवान को पहचान लो उनके बारे में जान ले।
3.आदमी कहीं न कहीं फेल-बड़े-बड़े लोग बड़े-बड़े कार्य में सफल हो जाते हैं बड़े आदमी छोटे कार्य में फेल हो जाते हैं आत्मा की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले संसार में फेल हो जाते हैं निश्चय की बात करने वाले व्यवहार में फेल होते पाए जाते हैं व्यवहार इतना सरल है कि मिथ्यादृष्टि भी पास हो रहा है और सम्यकदृष्टि व्यवहार में फेल हो रहा है।
4.अहसास जैनपने का- हमको संसार का हर चीज की अनुभूति होती है बाप को बाप बनने की अनुभूति आती सब कुछ अनुभव होती है लेकिन हमको 24 घंटे में एक बार भी जैनपने की अनुभूति नहीं होती मैं जैन ऐसा कभी अनुभूति नहीं होती हमें जैन होने की अनुभूति दिन में एक बार करे।
प्रवचन से शिक्षा-अपनी बलदीयत जानो,जैन होने का अहसास करे।
सकंलन ब्र महावीर 7339918672 परम गुरु भक्त30अप्रैल2021
नमनकर्ता-अरविंद जैन,रविंद्र जैन,सुकुमाल चंद जैन,चंद्रशेखर जैन,चंद्रप्रकाश सुभाष जैन पारसनाथ भगवान भोपाल
पुज्य सुधासागर जी के प्रवचनांश व अमृत सुधावाणी के लिए जुडे
7️⃣3️⃣3️⃣9️⃣9️⃣1️⃣8️⃣6️⃣7️⃣2️⃣📞
मेरा पेज पसंद करने के लिए विज़िट करें-https://www.facebook.com/106654181235078?referrer=whatsapp
