इच्छाएं बहुत, सब की पूर्ति संभव नहीं : मुनि प्रणम्य सागर

JAIN SANT NEWS

सदर स्थित जैन मंदिर में प्रवचन करते हुए मुनि प्रणम्य सागर ने कहा कि आज की इस प्रतिस्पर्धा में हर व्यक्ति एक दूसरे पर जीत करने का दावा करता है। वह हर तरीके से जोड़-तोड़ करता है कि वह कैसे ऊपर पहुंचे l इच्छाएं बहुत हैं पर सबकी पूर्ति संभव नहीं होती। व्यक्ति यह नहीं देखता कि मेरी योग्यता क्या है और पद सबसे ऊपर का पाना चाहता है।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति का मन चंचल होता है, जैसे ही इंद्रियां उसे आदेश देती हैं उसका मन उसी कार्य को करने के लिए दौड़ पड़ता है। व्यक्ति योग्यता अनुसार पुरुषार्थ के द्वारा मन और इंद्रियों को कंट्रोल करके कामयाबी की दिशा में कदम बढ़ा सकता है l अपने ज्ञान में, अपनी चाहत में उसे स्थिरता लानी होगी। मन में तरह-तरह के विचार उत्पन्न होते हैं और वह विचार उसको परेशानी की तरफ धकेलते हैं । मनुष्य को जीवन में कुछ बड़ा करके अपना जीवन धन्य करना चाहिए। भगवान तो अपने कर्म नष्ट करके मोक्ष चले गए, लेकिन हमें चाहिए कि उनके दिए हुए ज्ञान का हम उपयोग करें और अपने व अन्य सभी प्राणियों का हित करने में तत्पर रहें। मुनि प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि आज विद्या प्रणम्य सात्विक रसोई का शुभारंभ अतिथि भवन जैन मंदिर सदर सर्राफा बाजार मेरठ में होगा। इस शुभ रसोई का उद्देश्य यह है कि घर में अशुद्धि के समय या हॉस्पिटल में बीमार व्यक्तियों को, असहाय व्यक्तियों को और हॉस्टल में रहने वाले जैन बच्चों को शुद्ध भोजन की आवश्यकता हो सके। कहा कि 17 नवंबर दोपहर में मुनि श्री प्रणम्य सागर और मुनि श्री चंद्र सागर का पिच्छी परिवर्तन रंग महल निकट मेरठ पब्लिक स्कूल पर होगा।

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