समाधिस्थ तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज दीक्षा दिवस भाव भीनी विनयाजली

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समाधिस्थ तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज दीक्षा दिवस भाव भीनी विनयाजली
अनेक संतो ने इस धरा पर अवतरित होकर जन जन का कल्याण किया ऐसे ही त्याग तप की मूरत आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज जिनकी साधना जिनका तप युगो युगो तक जीवंत रहेगे आज उनका दीक्षा दिवस है जिन्होंने जिनधर्म के गौरव को पल्लवित किया वही रामगंजमंडी नगर 1991 मे उनका वर्षायोग भुला नहीं सकता मै स्वयम भी पुण्यशाली मानता हु की अल्प उम्र मे उनकी साधना को देखा सचमुच ऐसे संत जो कोमल लेकिन स्वयं के लिये कठोर एक आहार एक उपवास की साधना यह कोई निर्मोही साधक ही कर सकता आप अनुशासन प्रिय थे
आपके जीवन में सादगी है मौन प्रिय होकर हित मिट प्रिय वचन कहते है,आपके उपदेश में सिद्धांत सम्बन्धी उपदेश होगा जो प्रत्येक जीव के उत्थान के के लिए होगा ।संघ में कठोर अनुशासन है । आपके दर्शन से आँखों में ख़ुशी मिल जाती है और आपकी वाणी अमृत का कार्य करती है।
आचार्य श्री ने अपने जीवन काल में कठोर साधना कर चरित्र शुद्धि व्रत,दशलक्षण व्रत,मुक्तावली व्रत ,सर्वसोभाद्र मरण मत्यव्रत ,सोलह कारण व्रत किये । दिनों में केवल 17 दिन आहार लिया. दमोह चातुर्मास में उन्होंने एक आहार एक उपवास फिर दो उपवास एक आहार तीन उपवास एक आहार ………इस तरह बढते हुए, 15 उपवास एक आहार, 14 उपवास एक आहार, 13 उपवास एक आहार ,………..से करतेकरते एक उपवास एक आहार, तक पहुच कर सिंहनिष्क्रिदित महा कठिन व्रत किया. उन्होंने अपने 49 साल के तपस्वी जीवन में लगभग 9986 उपवास किये. लगभग 27.5 सालो से भी अधिक उपवास किये.
जिन्हे चरणों मे लगे हुये है उन चरणों का स्पर्शन
जिनकी निर्मल प्रिय वाणी मे होता था तीर्थंकर का शुभ दर्शन
परम पूज्य आचार्य सन्मति सागर जी महाराज को मेरा शत शत बार नमन
अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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