आर्यिका माताजी के दीक्षा दिवस पर भाव भीना नमन

आर्यिका माताजी के दीक्षा दिवस पर भाव भीना नमन आया है पावन दिन भक्ति की ओर दीक्षा जयंती पर भक्तों का है शोर अपनी आत्म साधना में रहती लीनी किंचित नही है भीनीहमको भी रहना है गुरु चरणों की ओर आया है पावन दिन भक्ति की ओर दीक्षा जयंती पर भक्तों का है शोरआज वो […]

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पूज्या प्रज्ञा पद्मनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी के दीक्षा दिवस पर माला सोनी बडनगर की भाव भीनी विनयांजली

पूज्या प्रज्ञा पद्मनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी के दीक्षा दिवस पर माला सोनी बडनगर की भाव भीनी विनयांजली परम पूज्या गणिनी आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी की श्रेष्टम शिष्या आशु कवियत्री प्रज्ञा पद्मनी प्रातः स्मरणीय पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी मेरी आराध्य मेरी गुरुमाँ जो अद्भुत अलोकिक असाधारण प्रतिभा की धनी है उनके चरणों […]

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भाग दस : मैं रावण… मेरा अंतिम संवाद! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रावण @ दस : भाग दस पिछले नौ दिनों में मैंने आपको मेरे जीवन के शुभ-अशुभ से मिले परिणामों को बताया। कर्मों की गति निराली है- कब ज्ञानी अज्ञानी बन जाए और कब अज्ञानी, ज्ञानी हो जाए… कोई नहीं जानता। आज आपसे मेरी आखरी वार्ता… कुछ भावुक है तो कुछ उपदेशात्मक। आज मैं आपसे अपने […]

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भाग नौ : मैं रावण…मेरा पछतावा मेरी अच्छाई का प्रमाण! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रावण @ दस : भाग नौ मैंने सीता का हरण तो किया, पर उसके साथ भोग नहीं किया, क्योंकि वह मुझे नहीं चाहती थी। वह मेरे अपने महल में थी तो भी मैंने जबरन उस पर अधिकार जमाना नहीं चाहा। मेरी पत्नी पटरानी मंदोदरी ने भी सीता को समझाया था कि तुम रावण को स्वीकार […]

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भाग आठ : मैं रावण… कुलधर्मी, सच्चा क्षमाधर्मी! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रावण @ दस : भाग आठ मैं रावण… मेरी दिग्विजय का लक्ष्य था- अपनी वंश परम्परा की राज्य नगरी लंका को पुन: प्राप्त करना। दिग्विजय मात्र शक्ति बढ़ाकर राजा इंद्र पर विजय प्राप्त करने के लिए थी, ना कि धनवृद्धि के लिए। आपको तो पहले ही बताया, राजा इंद्र ने ही लंका पर अधिपत्य स्थापित […]

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भाग सात : मैं रावण… दानी, अहिंसक और धर्म संरक्षक! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

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भाग छः : मैं रावण… एक सच्चा प्रभु भक्त! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रावण @ दस : भाग छः मैं रावण…जिसे तुम जलाने के लिए उत्सव मनाते हो, क्या उसके भक्त स्वरूप को जानते हो? शायद जानते होते तो मेरा पुतला जलाने के बजाय अपने मन में भक्ति का दीप जलाते। मेरी जिनेन्द्र भक्ति सदा सच्ची थी, तभी तो मैं तीर्थंकर प्रकृति के बन्ध को प्राप्त कर सका। […]

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भाग पाँच : मैं…मुनिभक्त रावण! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रावण @ दस : भाग पाँच मैं और मेरा परिवार मुनिभक्त था। हम सदा मुनिसेवा और उनके उपदेशों को ग्रहणकर नियम पालन किया करते थे। मैं अभिमानी भी नहीं था। जब कभी मुझसे अशुभ कर्म के उदय के कारण कोई अशुभ कार्य हुआ तो उसका मैंने प्रायश्चित भी किया। मेरे जीवन में अमिट छाप छोड़ […]

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भाग चार : मैं मातृ-पितृ भक्त था और दृढ़ निश्चयी भी! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रावण @ दस : भाग चार विद्याएं और सिद्धियाँ प्राप्त करने को की तपस्या मेरे व्यक्तित्व का एक और अच्छा पहलू था। मैं माता-पिता का सच्चा भक्त था। उनकी आज्ञा का पालन सदा करता था और जो जीवन में ठान लेता, उसे करके ही दम लेता था यानि दृढ़ संकल्पित था। मां बताया करती थीं […]

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भाग तीन : मैं सात्विक था… तामसिक नहीं! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रावण @ दस : भाग तीन नीति से दिग्विजय हुआ, कभी परस्त्री गमन नहीं स्वीकारा मैं सदा सात्विक विचारों वाला, धर्म और नीति का पालन करने वाला…पर विपरीत कर्मों की गति से मति बिगड़ी और एक ऐसी गलती कर बैठा जिसके कारण आज नरक भोग रहा हूं। आपको आश्चर्य होगा कि मैंने कभी मुझ पर […]

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भाग दो : मैं राक्षस नहीं… राक्षस वंश का हूँ! – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

रावण दस – मेरा वंश पापियों का नहीं, पुण्यात्माओं का है पिछली बार मैंने आपको अपने अच्छे और सच्चे पहलुओं से परिचित करवाने का वादा किया था, आज उसी को निभा रहा हूं। शुरुआत करता हूं वहां से, जहां मैंने जन्म लिया… किसी भी व्यक्ति की पहचान वैसे तो उसके व्यक्तित्व से होनी चाहिए लेकिन […]

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भाग एक : मैं रावण… भविष्य का तीर्थंकर! – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज

रावण@ दस : भाग एक पूरा देश मुझे यानि रावण को जलाने के लिए मेरा पुतला बनाने में जुट गया है… अब जलाने के लिए मेरा प्रतीक पुतला तो बनाओगे ही ना। मैं रावण, एक प्रकाण्ड पंड़ित, अनन्य ईश्वर भक्त, विद्वान, अत्यंत बलशाली पर आज मुझे इस तरह कोई नहीं जानता, सब मुझे केवल और […]

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जब कुंडलपुर क्षेत्र के इतिहास की गौरव गाथा की अभूतपूर्व प्रस्तुति के साथ पाठशाला का वार्षिक समारोह संपन्न  हुआ था

जब कुंडलपुर क्षेत्र के इतिहास की गौरव गाथा की अभूतपूर्व प्रस्तुति के साथ पाठशाला का वार्षिक समारोह संपन्न  हुआ था रामगंजमडी नगर की संस्कारशाला अर्थात् शान्तिनाथ दिगम्बर जैन पाठशाला रामगंजमडी का वार्षिक समारोह अभूतपूर्व उल्लास से शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में मनाया गया। आयोजन का आगाज श्री जी के चित्र के समक्ष्य कार्यक्रम के […]

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कल्पतरु विधान कल्पवृक्ष के जैसा फल देने वाला है विशल्य सागर जी

कल्पतरु विधान कल्पवृक्ष के जैसा फल देने वाला है विशल्य सागर जी झुमरी तिलैया कोडरमा श्री दिगम्बर जैन नया मंदिर के निकट रानी सती धर्मशाला में आयोजित ऐतिहासिक चातुर्मास अंतर्गत श्री 1008 चौबीस समवसरण महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का महाआयोजन श्रमण मुनिश्री 108 विशल्य सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में पूरी भक्ति और उत्साह […]

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सिद्धचक्र महामंडल विधान विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुआ सम्पन्न

सिद्धचक्र महामंडल विधान विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुआ सम्पन्न पिडावा : -नगर के श्री पारसनाथ दिगंबर जैन जुना मंदिर नवीन जिनालय खंडूपुरा में गत नो दिनो से चल रहा श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुआ सम्पन्न जैन समाज प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि पिड़ावा नगर में गत आठ […]

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दीक्षार्थी दीदियों ने दीक्षा से पूर्व किया अभिषेक पूजन

दीक्षार्थी दीदियों ने दीक्षा से पूर्व किया अभिषेक पूजनश्री महावीर जीपंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारीधी आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी संघ सानिध्य में चारो दीक्षार्थी साधना दीदी, नेहा दीदी , दीप्ती दीदी तथा पुनम दीदी ने 1008 श्री शांतिनाथ भगवान का पंचामृत से महा मस्तकाभीषेक बहुत ही उमंग और उत्साह भक्ति भाव से किया। आज जल […]

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पुरुस्कार में मिली कोई भी वस्तु को बेचना नही फेकना नही सुधासाग़र महाराज

पुरुस्कार में मिली कोई भी वस्तु को बेचना नही फेकना नही सुधासाग़र महाराज ललितपुर पूज्य गुरुदेव सुधासागर महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा की कुछ नीतियां बनाई गयी हैं जो सर्वथा सत्य हैं, जैसे आग के कुंड से कभी पानी नही निकल सकता, अंधा व्यक्ति कभी रंग नही बता सकता, गरीब व्यक्ति […]

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धर्म,अर्थ,काम और प्राणों का भय यदि इन चारो कसोटियो पर यदि तुमने अपने आप को इन कसोटियो पर कस लिया तो कभी धोखा नहीं खाओगे प्रमाण सागर महाराज

धर्म,अर्थ,काम और प्राणों का भय यदि इन चारो कसोटियो पर यदि तुमने अपने आप को इन कसोटियो पर कस लिया तो कभी धोखा नहीं खाओगे प्रमाण सागर महाराज पारसनाथ गुणायतन तीर्थ पर पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज  ने अपने उद्बोधन मे कहा की यदि मानव धर्म,अर्थ,काम और प्राणों का भय यदि इन चारो कसोटियो […]

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धम्म शरण गच्छामि या सिद्ध शरण गच्छामि के स्थान पर इंसान भोजन शरण गच्छामि या पत्नी शरणम् गच्छामि कहता है मुनि श्री संथान सागर

धम्म शरण गच्छामि या सिद्ध शरण गच्छामि के स्थान पर इंसान भोजन शरण गच्छामि या पत्नी शरणम् गच्छामि कहता है मुनि श्री संथान सागर महाराज बडवानी पूज्य मुनि श्री 108 संथान सागर जी महाराज ने सिद्चक्र महामंडल विधान की बेला मे कहा धम्म शरण गच्छामि या सिद्ध शरण गच्छामि के स्थान पर इंसान भोजन शरण […]

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2022 – एलाचार्य पद प्रतिष्ठापन दिवस पर विशेष आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज

 2022 – एलाचार्य पद प्रतिष्ठापन दिवस पर विशेषआचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज प्रशममूर्ति आचार्य श्री 108 शान्तिसागर जी महाराज (छाणी) की परम्परा में पंचम पट्टाचार्य परम पूज्य गुरुवर आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज ने राजधानी दिल्ली में जन्में एक नवयुवक ब्र नीरज जैन को महावीर जयंती 2006 के अवसर पर त्रिलोक […]

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