मानवता के साधक- आचार्य विशुद्ध सागर महाराज

भारतीय वसुन्धरा पर अनादि सनातन श्रमण संस्कृति, जैन धर्म में दिगम्बर आचार्य, उपाध्याय एवं वीतरागी दिगम्बरी यथाजात, पग-विहारी, करपात्री मुनियों का स्तुत्य है. क्षमाशीलता, अहिंसा-प्रियता, शाकाहार, निष्पृहता, सत्याचरण, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रहता आत्मोकर्ष ही इनका लक्ष्य है. जैन साधकों की कठिन चर्या और क्रियाएँ जन-सामान्य के लिए प्रेरणा पुंज हैं. ऐसे ही साधक हैं, आध्यात्म के पुरोधा, […]

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