16 भाषाओं के ज्ञाता मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज के आशीर्वचन से जैन संगोष्ठी का समापन
श्रमण और श्रावक दोनों एक दूसरे के लिए महत्वपूर्णः मुनि श्री आदित्य सागर जी जैन दर्शन और जैनाचार दोनों ही पूर्णरूपेण वैज्ञानिकः डॉ. अनुपम जैन श्रमणाचार श्रावकाचार पर तीन दिवसीय संगोष्ठी सम्पन्न इंदौर। समोसरण मंदिर, कंचन बाग में श्रमणाचार श्रावकाचार विषय पर 13 से 15 अगस्त तक आयोजित तीन दिवसीय जैन विद्वत संगोष्ठी के अंतिम दिवस […]
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